चंद्रयान-2 का 1 साल पूरा, चांद के लगाए 4400 चक्कर, 7 साल तक और करेगा काम

चैतन्य भारत न्यूज

नई दिल्ली. चंद्रयान-2 (Chandrayaan-2) ने चांद की कक्षा में परिक्रमा लगाते हुए एक साल पूरा कर लिया है। उसकी तबीयत बिलकुल ठीक है और अभी सात साल का ईंधन उसके भीतर मौजूद है। यह धरती पर हमें नई-नई जानकारियां भेजता रहेगा। अंतरिक्ष एजेंसी इसरो (ISRO) ने बताया कि इस एक साल में चंद्रयान-2 के ऑर्बिटर ने चांद की कक्षा में 4400 चक्कर लगाए हैं।


इस मौके पर अंतरिक्ष एजेंसी इसरो (ISRO) ने मिशन से जुड़ा प्रारंभिक डेटा सेट जारी करते हुए बताया कि, भले ही विक्रम लैंडर सॉफ्ट लैंडिंग में असफल रहा, लेकिन ऑर्बिटर ने चंद्रमा के चारों ओर 4400 परिक्रमाएं पूरी कर ली हैं और सभी आठ ऑन-बोर्ड उपकरण अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। ऑर्बिटर में उच्च तकनीक वाले कैमरे लगे हैं, ताकि वह चांद के बाहरी वातावरण और उसकी सतह के बारे में जानकारी जुटा सके।

बता दें चंद्रयान-2 की लॉन्चिंग 22 जुलाई 2019 को की गई थी। ठीक एक साल पहले 20 अगस्त को इसने चंद्रमा की कक्षा में प्रवेश किया था। इसरो के मुताबिक, इस समय ऑर्बिटर चंद्रमा की सतह से 100 किलोमीटर ऊपर की गोलाकार कक्षा में चक्कर लगा रहा है। इसरो वैज्ञानिक जरूरत के मुताबिक इसकी ऊंचाई 25 किलोमीटर कम ज्यादा करते रहते हैं। ताकि किसी तरह का हादसा न हो। इससे कोई अंतरिक्षीय वस्तु न टकराए।

इसरो के वैज्ञानिकों ने बताया कि, कई बार विभिन्न कारणों से ऑर्बिटर अपने तय रास्ते से भटक भी जाता है तो उसे वापस उसकी कक्षा में लाने के लिए बचे हुई ईंधन का उपयोग किया जाता है। ईंधन के जरिए इंजन ऑन कर उसे निर्धारित कक्षा में वापास ले आया जाता है। बता दें 24 सितंबर 2019 से लेकर अब तक इसरो ने 17 बार ऑर्बिटर को चांद की कक्षा में पुनः स्थापित किया है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वह भटक गया था। बल्कि, इसे जरूरत के हिसाब से कक्षा में सेट किया जाता है। इसे ऑर्बिट मैन्यूवरिंग कहते हैं।

इसरो ने कहा कि चंद्रयान-2 के ऑर्बिटर में लगे टेरेन मैपिंग कैमरा-2 (TMC-2) ने चांद के 40 लाख वर्ग किलोमीटर सतह की हजारों तस्वीरें ली हैं। ये तस्वीरें उसने चांद की कक्षा 220 बार घूमते हुए ली। इसका रिजोल्यूशन 30 सेंटीमीटर है। यानी चांद की सतह पर अगर दो वस्तुएं 30 सेंटीमीटर की दूरी पर हैं, तो ये आसानी से उनकी स्पष्ट तस्वीरें लेकर उनमें अंतर दिखा सकेगा।

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