लोक आस्था का महापर्व छठ पूजा कल से शुरू, जानें ‘नहाय खाय’ से लेकर ‘सूर्योदय के अर्घ्य’ के बारे में सबकुछ

chhath puja

चैतन्य भारत न्यूज

दीपावली का त्योहार बीतते ही लोग छठ पूजा की तैयारियां शुरू कर देते हैं। छठ पर्व खासतौर से पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड का लोक पर्व है। लेकिन अब यह पूरे भारत में धूमधाम के साथ मनाया जाता है। छठ पूजा में सूर्य देव और छठी मैया की पूजा विधि विधान से की जाती है। यह महापर्व तीन दिनों तक चलता है। छठ पर्व की शुरुआत ‘नहाय खाय’ से होती है और इस बार 31 अक्टूबर को ‘नहाय खाय’ मनाया जाएगा।


पहला दिन ‘नहाय खाय’

‘नहाय खाय’ के दिन छठ का व्रत रखने वाले लोग स्नान करने के बाद नए कपड़े पहनते हैं और फिर खाना खाते है। ‘नहाय खाय’ वाले दिन एक बात का खास ध्यान रखा जाता है कि खाने में किसी भी प्रकार का मसाला, लहसुन और प्याज नहीं मिलाया जाता है। यानी कि इस दिन काफी साधारण तरीके से खाना बनाकर खाया जाता है। व्रती के भोजन करने के बाद ही घर के बाकी लोग भोजन करते हैं।

दूसरे दिन ‘खरना’

छठ पर्व के दूसरे दिन ‘खरना’ होता है जो इस बार 1 नवंबर को मनाया जाएगा। इस दिन शाम को रोटी और गुड़ की खीर का प्रसाद बनाया जाता है। इसके अलावा प्रसाद में चावल, दूध के पकवान, ठेकुआ भी बनाया जाता है। ‘खरना’ वाले दिन फल-सब्जियों से पूजा की जाती है और फिर व्रत रखने वाले लोग पूरे दिन का उपवास रखकर शाम के समय भोजन करते हैं।

तीसरे दिन डूबते सूर्य को अर्घ्य

छठ के तीसरे दिन शाम के अर्घ्य् वाले दिन शाम के पूजन की तैयारियां की जाती हैं। इस बार शाम का अर्घ्य 2 नवंबर को दिया जाएगा। इस दिन छठ का व्रत रखने वाले लोग पूरे दिन निर्जला व्रत करते हैं और फिर नदी, तालाब में खड़े होकर ढलते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। इसके बाद अगली सुबह की पूजा की तैयारियां शुरू हो जाती हैं।

छठ पूजा का चौथा दिन

कार्तिक शुक्ल सप्तमी की सुबह यानी छठ पूजा के चौथे दिन पानी में खड़े होकर उगते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। अर्घ्य देने के बाद व्रती सात बार परिक्रमा भी करते हैं। इसके बाद एक दूसरे को प्रसाद देकर व्रत खोला जाता है और इस तरह छठ पूजा संपन्न होती है। सप्तमी तिथि 3 नवंबर को है।

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