दुर्लभ बीमारी से पीड़ित है 14 महीने की यह बच्ची, जान बचाने के लिए लगेगा 22 करोड़ का इंजेक्शन, पिता ने लगाई मदद की गुहार

चैतन्य भारत न्यूज

बिलासपुर के अपोलो अस्पताल में जिदंगी और मौत से जंग लड़ रही 14 माह की सृष्टि एसएमए टाइप वन (स्पाइनल मस्कुलर एट्राफी) नामक एक दुर्लभ बीमारी से ग्रसित है। इसकी वजह से सृष्टि पिछले 8 महीने से जिंदगी के लिए संघर्ष कर रही है। यह नन्ही सी जान पिछले 47 दिन से वेंटिलेटर पर है। इस बच्ची को भी मुंबई की तीरा कामत की तरह 22.5 करोड़ रुपए का इंजेक्शन लगना है। अपनी बेटी की जान बचाने के लिए अब उसके पिता भी पूरे देश से मदद की गुहार लगा रहे हैं।

सृष्टि के पिता सतीश कुमार मूल रूप से झारखंड में पलामू जिले के कांके कला सिक्की गांव के रहने वाले हैं। वह कोरबा के दीपका स्थित कोल माइनिंग कंपनी SECL में काम करते हैं। सृष्टि के पिता ने बताया कि उसका जन्म 22 नवंबर 2019 को हुआ था। जन्म के चार-पांच महीने तक तो सबकुछ सामान्य रहा। लेकिन फिर अचानक सृष्टि के हाथ-पैरों ने काम करना बंद कर दिया। जब डॉक्टरों ने जांच की तो बताया कि उसकी गर्दन सही तरीके से काम नहीं कर रही। इलाज के लिए किसी एक्सपर्ट को दिखाएं।

बच्ची के पिता ने बताया कि, जून में रायपुर में कई एक्सपर्ट को दिखाने के बाद भी उसकी बीमारी पकड़ में नहीं आई। धीरे-धीरे सृष्टि की हालत बिगड़ने लगी। फिर दिसंबर में उसे वेल्लूर (तमिलनाडु) ले गए, जहां SMA टाइप वन टेस्ट किया गया। इसकी रिपोर्ट 23 जनवरी को आई, लेकिन 30 दिसंबर को तबीयत ज्यादा बिगड़ी तो सृष्टि को अपोलो अस्पताल में भर्ती किया गया। फिर सतीश ने छत्तीसगढ़ और झारखंड सरकार से आर्थिक मदद मांगी। सृष्टि के लिए 13 दिन में 3 लाख 29 हजार रुपयों का ही इंतजाम हो पाया है।

क्या है SMA बीमारी?

स्पाइनल मस्क्यूलर अट्रॉफी (SMA) बीमारी हो तो शरीर में प्रोटीन बनाने वाला जीन नहीं होता। इससे मांसपेशियां और तंत्रिकाएं (Nerves) खत्म होने लगती हैं। दिमाग की मांसपेशियों की एक्टिविटी भी कम होने लगती है। सांस लेने में दिक्कत होने लगती है। चूंकि मस्तिष्क से सभी मांसपेशियां संचालित होती हैं, इसलिए सांस लेने और भोजन चबाने तक में दिक्कत होने लगती है। SMA कई तरह की होती है, लेकिन इसमें Type 1 सबसे गंभीर है। यह बीमारी ज्यादातर बच्चों को ही होती है और बाद में दिक्कत बढ़ने के साथ मरीज की मौत हो जाती है। ब्रिटेन में ये बीमारी ज्यादा है और वहां करीब 60 बच्चे हर साल ऐसा पैदा होते हैं जिन्हें ये बीमारी होती है।

क्यों इतना महंगा है ये इंजेक्शन?

ब्रिटेन में इस रोग से ज्यादा बच्चे पीड़ित हैं लेकिन वहां इसकी दवा नहीं बनती है। इस इंजेक्शन का नाम जोलगेनेस्मा है। ब्रिटेन में इस इंजेक्शन को इलाज के लिए अमेरिका, जर्मनी और जापान से मंगाया जाता है। इस बीमारी से पीड़ित मरीज को यह इंजेक्शन सिर्फ एक ही बार दिया जाता है इसी वजह से यह इतनी महंगी है क्योंकि जोलगेनेस्मा उन तीन जीन थैरेपी में से एक है जिसे यूरोप में इस्तेमाल करने की अनुमति दी गई है।

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