इस शिव मंदिर में साल में सिर्फ एक बार होती है पूजा, दर्शन के लिए एक ही नदी को 16 बार लांघना पड़ता है

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चैतन्य भारत न्यूज

दुनिया में भगवान शिव के ऐसे कई मंदिर हैं जो अपने आप में ही अनोखे हैं। आज हम आपको भगवान शिव के एक ऐसे मंदिर के बारे में बताएंगे, जहां साल में सिर्फ एक बार ही पूजा होती है। बता दें छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले में घनघोर जंगलों के बीच गुफा में एक शिवलिंग स्थापित है, जिसे लोग मंढीप बाबा के नाम से जानते हैं।

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गुफा तक पहुंचने का रास्ता बहुत कठिन है लेकिन उससे भी ज्यादा कठिन है शिवलिंग तक पहुंचना। गुफा तक पहुंचने के बाद करीब 250 मीटर की दूरी पर शिवलिंग विराजमान है। इस शिवलिंग के बारे में स्थानीय लोगों का कहना है कि, इसका इतिहास कोई नहीं जानता। शिवलिंग को किसने और कब स्थापित किया यह कोई नहीं जानता। कहा जाता है कि वहां बाबा स्वयं प्रकट हुए हैं। यानी शिवलिंग का निर्माण प्राकृतिक रूप से हुआ है।

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कहा जाता है कि अगर आप किसी सामान्य दिन इस शिवलिंग के दर्शन करना चाहें तो यह संभव नहीं, क्योंकि यहां भोलेनाथ के दर्शन साल में सिर्फ एक ही दिन कर सकते हैं। यह दिन है अक्षय तृतीया के बाद आने वाला सोमवार। हर साल अक्षय तृतीया के बाद पड़ने वाले पहले सोमवार पर गुफा में पास के इलाके के हजारों लोग दर्शन के लिए आते हैं। लोग काफी कठिनाई से रोशनी की व्यवस्था साथ लेकर बाबा के दर्शन करने पहुंचते हैं। गुफा में एक साथ 500-600 लोग प्रवेश कर जाते हैं।

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दिलचस्प बात ये है कि गुफा में जाने के लिए एक ही नदी को 16 बार लांघना पड़ता है। यह कोई अंधविश्वास नहीं है, बल्कि वहां जाने का रास्ता ही इतना घुमावदार है कि वह नदी रास्ते में 16 बार आती है। यहां के लोग बताते हैं कि इस गुफा का दूसरा छोर अमरकंटक में है जो यहां से करीब 500 किमी की दूरी पर स्थित है।

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