‘दृश्यम’ फिल्म देख 13 साल के बच्चे ने की साथी की हत्या, विशेषज्ञों ने जाहिर की चिंता, बताया- इस ऐप के जरिए अपने बच्चों को काबू में करें

चैतन्य भारत न्यूज

कोरोना वायरस के चलते बच्चों को ऑनलाइन ही पढ़ाई करवाई जा रही है। ऐसे में माता-पिता को उन्हें ना चाहते हुए भी मोबाइल फ़ोन देना ही पड़ता है। लेकिन कई बार ध्यान ना देने पर बच्चे पढ़ने के बहाने मोबाइल का कुछ और ही इस्तेमाल करने लग जाते हैं। ऐसा ही एक मामला महाराष्ट्र के पुणे से सामने आया है। यहां एक 13 साल के बच्चे ने जरा से झगड़े में अपने ही 11 साल के साथी की हत्या कर दी। जब पुलिस ने इस मामले की जांच की तो हैरान कर देने वाले परिणाम सामने आए।

बच्चे ने पहले फिल्म ‘दृश्यम’ को मोबाइल पर डाउनलोड कर उसे बार-बार देखा और उसके बाद इस वारदात को अंजाम दिया। पुलिस के मुताबिक, सड़कों पर बेवजह वाहनों की तोड़फोड़ के मामले में भी कई नाबालिग बच्चे शामिल पाए गए। जब बच्चों की ऐसी हरकत को लेकर स्टडी की गई तो यह पता चला कि बच्चे स्मार्टफोन का बेतहाशा इस्तेमाल कर रहे हैं और तत्काल मशहूर होने के लिए किसी भी हद को पार करने को तैयार है।

पुणे के असिस्टेंट पुलिस कमिश्नर सुरेंद्र देशमुख ने कहा कि, ‘शहर में ज्यादातर पालक नौकरी के लिए घर से बाहर होते हैं। उन्हें पता ही नहीं रहता कि बच्चे मोबाइल में क्या देख रहे हैं, कैसा बर्ताव कर रहे हैं, उनके दोस्त कौन हैं। इसलिए माता-पिता का जागरूक होना बेहद जरूरी है।’

प्रसिद्ध साइबर साइकोलॉजिस्ट निराली भाटिया ने भी इस मामले में कहा कि, ‘माता पिता का बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखना बहुत जरूरी है। खासकर किशोरावस्था में। गूगल के फैमिली लिंक जैसे एप से आसानी से माॅनिटरिंग हो सकती है। माता-पिता काे यह पता हाेना चाहिए कि उनका बच्चा इंटरनेट पर कितना समय बिता रहा है, वह क्या देख रहा है, पढ़ाई के अलावा वह कितनी देर चैटिंग और गेम खेलते है। लेकिन इस बात का भी ध्यान रखना हाेगा कि बच्चाें काे यह न लगे कि आप उनकी जासूसी कर रहे हैं। इसलिए, मोबाइल ऐसी जगह ही रखें जहां हर वक्त आपकी नजर हाे।’

उन्होंने बताया कि माता-पिता बच्चों की हर ऑनलाइन एक्टिविटी में शाामिल हाें। उन्हें बताएं कि अच्छे और बुरे कंटेंट में क्या फर्क है। कुछ गलत करे तो समझाएं, क्योंकि एप तो तभी काम करेगा, जब मोबाइल ऑन रहेगा या बच्चे के साथ रहेगा। डांट-फटकार से बच्चा मोबाइल बंद कर सकता है या फिर उसे कहीं छोड़ कर आपको गुमराह भी कर सकता है।’

  • आप मोबाइल में गूगल फैमिली लिंक ऐप डाउनलोड करें।
  • फिर उसकी सेटिंग्स पर जाएं।
  • इसके बाद लोकेशन, टाइमिंग्स, रिपोर्ट पर क्लिक करें।
  • ये आपकी मेल से लिंक अप रहेगा।
  • इससे आप इन गतिविधियों को नियंत्रित कर सकते हैं।
  • इसके जरिए आप हर वक्त बच्चे की लोकेशन जान सकेंगे।
  • इंटरनेट उपयोग की समय सीमा तय कर सकेंगे।
  • उनकी इंटरनेट उपयोग की रिपोर्ट ले सकेंगे।
  • मोबाइल में किसी भी एप को इजाजत दे सकते हैं या ब्लॉक भी कर सकते हैं।
  • यानी बच्चा सिर्फ वही एप इस्तेमाल कर सकेगा, जिनकी आप इजाजत देंगे।

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