बच्चों का यौन शोषण रोकने के लिए कानून और कड़ा

चैतन्य भारत न्यूज

यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण के लिए बने पोक्सो एक्ट में संशोधन कर दिया गया है। संशोधित एक्ट लोकसभा में एक अगस्त को और राज्यसभा में 24 जुलाई 2019 को पारित हो गया। इस कानून में बच्चों के साथ गंभीर यौन दुर्व्यवहार के दोषियों के लिए मौत की सजा का प्रावधान है। इसके अलावा बच्चों के प्रति यौन अपराधों को लेकर नियमों को सख्त किया गया है।

गैर जमानती अपराध

इस कानून में बच्चों का यौन उत्पीड़न करने के उद्देश्य से उन्हें दवा या रसायन आदि देकर जल्दी युवा करने (जैसे लड़कियों को हार्मोन आदि के इंजेक्शन देना) को गैर जमानती अपराध बनाया गया है। इसमें पांच साल तक की कैद का प्रावधान है।

मिलेगी मौत की सजा

नए कानून के तहत बच्चों का यौन उत्पीड़न करने वाले दोषियों को उम्रकैद के साथ मौत की सजा का भी प्रावधान किया गया है।

लिंग विभेद नहीं करता कानून

इस नए प्रावधान के तहत केवल बच्चियों ही नहीं बल्कि लड़कों को भी यौन उत्पीड़न से बचाया जा सकेगा। लड़का हो लड़की दोनों के मामले में कानून एक जैसा होगा।

चाइल्ड पोर्नोग्राफी की परिभाषा तय

नए कानून में चाइल्ड पोर्नोग्राफी की परिभाषा तय की गई है। इसमें चाइल्ड पोर्नोग्राफी की फोटो, वीडियो, कार्टून या फिर कम्प्यूटर जनरेटेड इमेज बनाने को इसके तहत दंडनीय अपराध में शामिक किया गया है। इससे जुड़ी सामग्री रखने पर पांच हजार से लेकर 10 हजार रुपए तक के जुर्माने व दंड की व्यवस्था की गई है। लेकिन अगर कोई ऐसी सामग्री का व्यावसायिक उपयोग करता है तो उसे जेल की सख्त सजा होगी।

यह है पोक्सो एक्ट

वर्ष 2012 में यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण के लिए पोक्सो एक्ट बनाया गया था। इस कानून के जरिए बच्चों के साथ होने वाले यौन अपराध और छेड़छाड़ के मामलों में कार्रवाई की जाती है। यह कानून बच्चों के यौन शोषण, यौन दुर्व्यवहार और पोर्नोग्राफी जैसे गंभीर अपराधों से सुरक्षा प्रदान करता है। इस कानून के तहत अलग-अलग अपराध के लिए अलग-अलग सजा तय की गई है।

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