जैश सरगना मसूद अजहर को अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी घोषित करने की राह में फिर बाधा बना चीन

चैतन्य भारत न्यूज डेस्क

चीन ने पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर को अंतरराष्ट्रीय आतंकवादियों की ब्लैक लिस्ट में शामिल किए जाने की कोशिश पर अड़ंगा लगा दिया है। भारत में पुलवामा हमले के बाद अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस की ओर से मसूद अजहर को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आतंकियों की ब्लैक लिस्ट में शामिल करने का प्रस्ताव पेश किया गया था। चीन ने बुधवार को अंतिम क्षणों में इस प्रस्ताव पर रोक लगा दी। एजेंसियों के मुताबिक सुरक्षा परिषद को दिए अपने पक्ष में चीन ने कहा है कि वह मसूद अजहर पर प्रतिबंध लगाने की अपील को विस्तार से समझने के लिए और समय चाहता है।

10 साल में कई बार चीन ने मसूद को लेकर अपने वीटो (फैसला रोकने का अधिकार) का उपयोग किया है। बताया जा रहा है कि चीन ने तकनीकी बाधा को आधार बनाकर वीटो किया। चीन इससे पूर्व साल 2016 और 2017 में मसूद पर प्रतिबंध लगाने के प्रयासों को रोक चुका है। गौरतलब है कि मसूद के संगठन जैश-ए-मोहम्मद को साल 2001 में ही आतंकी संगठन घोषित कर दिया गया था।

मसूद को यदि इस ब्लैक लिस्ट में शामिल कर लिया जाता तो उस पर यात्रा से जुड़े प्रतिबंध लग जाते और उसकी अंतरराष्ट्रीय संपत्तियों को जब्त किया जा सकता था। अजहर को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की 1267 अलकायदा प्रतिबंध समिति के तहत प्रतिबंधित करने का प्रस्ताव फ्रांस, ब्रिटेन और अमेरिका की ओर से 27 फरवरी को रखा गया था।

जैश-ए-मोहम्मद ने ही हाल ही में कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर हुए आतंकी हमले की जिम्मेदारी ली थी। इसमें 40 जवान शहीद हो गए थे। इसी आतंकी हमले के बाद भारत-पाक के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया था।

चीन पर थीं सभी की निगाहें
भारत की ओर से तीन बार अजहर मसूद पर प्रतिबंध के प्रयास हो चुके हैं। इस बार भी सभी की नजरें चीन पर ही थी। आशंका थी कि वह अड़ंगा डालेगा और उसने वैसा ही किया। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लू कांग ने सोमवार को ही संकेत दे दिया था।

चीन के रवैये से निराशा : भारत
चीन द्वारा वीटो करने पर भारतीय विदेश मंत्रालय ने निराशा प्रकट की है। मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि हम भारत के नागरिकों पर हमले में लिप्त आतंकवादियों को न्याय के दायरे में लाने के सारे उपलब्ध विकल्पों का उपयोग करते रहेंगे। प्रस्ताव का समर्थन करने वाले सभी देशों का भारत आभार प्रकट करता है।

2009 में आया था पहला प्रस्ताव

  • 2009 में भारत ने मसूद को वैश्विक आतंकी घोषित करने का प्रस्ताव पेश किया था।
  • 2016 में अमेरिका, ब्रिटेन व फ्रांस के साथ भारत ने प्रस्ताव रखा था।
  • 2017 में अमेरिका, ब्रिटेन व फ्रांस ने प्रस्ताव रखा था।
  • 2019 में फिर अमेरिका, ब्रिटेन व फ्रांस ने प्रस्ताव रखा, लेकिन वह भी खारिज हो गया।

कई आतंकी हमलों का मास्टरमाइंड रहा है मसूद
उल्लेखनीय है कि भारत लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का ध्यान इस ओर आकर्षित कर रहा है कि जैश-ए- मोहम्मद पर संयुक्त राष्ट्र ने प्रतिबंध लगाया है, लेकिन उससे सरगना को ब्लैक लिस्ट नहीं किया जा रहा है। बताया जाता है कि अजहर पाकिस्तान में पंजाब प्रांत के बहावलपुर में कौसर कालोनी में रहता है। जनवरी 2016 में पंजाब के पठानकोट में भारतीय वायु सेना के बेस पर जैश के हमले के बाद भारत ने संयुक्त राष्ट्र की ओर से अजहर पर प्रतिबंध लगाने को लेकर अपनी कोशिशें तेज कर दी थीं। इसमें भारत को अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस का भी समर्थन मिला था, लेकिन चीन ने इसका विरोध किया था।

चीन का पाकिस्तान की तरफ इसलिए झुकाव
एशिया में भारत से मुकाबले और OBOR प्रॉजेक्ट में चीन को पाक की जरूरत।
मुस्लिम देशों और गुटनिरपेक्ष देशों के संगठन में पाकिस्तान चीन का साथ देता है।
चीन को भारत-अमेरिका की दोस्ती बर्दाश्त नहीं, इसलिए मसूद जैसे मुद्दे में उलझाना उद्देश्य।
तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा के भारत में शरण से भी नाराज रहता है चीन।

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