नागालैंड के इस गांव ने पेश की नई मिसाल, यहां महिलाओं को मिलता है पुरुषों के बराबर वेतन

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चैतन्य भारत न्यूज

दुनिया के जिन देशों में महिला कामगार सबसे कम है उनमें भारत दूसरे नंबर पर है। आर्थिक सर्वे के मुताबिक, देश में सबसे कम न्यूनतम मजदूरी नागालैंड में 136 रुपए है। इन दोनों ही तथ्यों से उलट उदाहरण है नागालैंड के फेक जिले का चिजामी गांव।



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इस गांव में सभी पुरुष ही नहीं बल्कि हर महिला भी कामकाजी हैं। इस गांव में महिलाओं की न्यूनतम मजदूरी भी पुरुषों के ही सामान 450 है। यहां की महिलाओं ने बुनाई के परंपरागत हुनर को आज के दौर के हिसाब से बदला, साथ ही इसे कमाई का जरिया बना लिया। इसके लिए उन्होंने मुंबई और दिल्ली के फैशन डिजाइनर्स से ट्रेनिंग ली। आज इनके बनाए शॉल, मफलर, वॉल हैंगिंग मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरु के बाजारों में पहुंच रहे हैं। इतना ही नहीं बल्कि हैंडीक्राफ्ट एंड हैंडलूम एक्सपोर्ट कॉरपोरेशन यह सामान विदेश भी भेज रहा है।

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यहां महिलाओं की कमाई गांव के पुरुषों की कमाई से अधिक हो गई है। इनका ‘चिजामी वाव्स’ ब्रांड बन चुका है। नॉर्थ ईस्ट सोशल रिसर्च सेंटर के निदेशक डॉक्टर हेक्टर डिसूजा बताते हैं कि, ‘यह मेहनती महिलाएं सुबह 3-4 बजे उठ जाती हैं। सुबह लूम पर बुनाई, दोपहर में खेत में काम और शाम को फिर बुनाई करती हैं। इस बीच परिवार और रसोई का काम भी करती हैं। साल 2008 में इन्होंने बुनाई को बिजनेस मॉडल बनाना शुरू किया था। यहां आईडिया नॉर्थ ईस्ट नेटवर्क संस्था की सेनो सुहाह का था।

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सेनो बताती है कि, ‘यहां हर घर में बुनाई होती है। आसपास के 16 गांवों की 600 महिलाएं भी हमसे जुड़ गई हैं। सालाना टर्न ओवर 50 लाख रुपए को पार कर गया है। यहां हर महिला कमाती है। साथ ही अपने फैसले खुद लेती है। हमने खेती में भी  नए तरीके अपनाए हैं। करीब 61 किस्म के अनाज और सब्जियों के बीजों का बैंक बनाया है। इसके अलावा झूम खेती को भी अपनाया है। झूम यानी सामूहिक काम, इसमें सब मिलकर काम करते हैं और फसल भी समान रूप से बंटती है।’

महिलाओं को देश के औसत से 22% ज्यादा पारिश्रमिक

यहां समान पारिश्रमिक के लिए महिलाओं ने 7 साल संघर्ष किया। इसके बाद साल 2014 में ग्राम परिषद ने महिला पुरुष मानदेय समान किया। महिला पुरुष दोनों को खेती में 400 से 450 रुपए पारिश्रमिक मिलता है। बल्कि देश में महिला किसानों को पुरुष से 22% कम पारिश्रमिक मिलता है।

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