नागरिकता कानून पर रोक लगाने से SC का इनकार, चार हफ्ते में केंद्र से मांगा जवाब

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चैतन्य भारत न्यूज

नई दिल्ली. नागरिकता संशोधन कानून को लेकर दायर 144 याचिकाओं पर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने इस प्रक्रिया पर तुरंत किसी भी तरह की रोक लगाने से इनकार कर दिया है। साथ ही कोर्ट ने इन सभी याचिकाओं के जवाब देने के लिए केंद्र सरकार को चार हफ्ते का समय दिया है। इस मामले पर दर्ज याचिकाओं को सुनने के लिए संविधान पीठ का गठन किया जा सकता है। पांचवें हफ्ते में चीफ जस्टिस की पीठ इस मामले में सुनवाई कर सकती है। पढ़ें सुनवाई से जुड़ी दस बड़ी बातें-



  1. चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया एस ए बोबड़े, जस्टिस एस अब्दुल नजीर और जस्टिस संजीव खन्ना की बेंच ने आज इन 144 याचिकाओं पर सुनवाई की। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि, ‘हम कुछ याचिकाओं को बड़ी बेंच के पास भेज सकते हैं।’ एटॉर्नी जनरल ने कहा कि, ‘144 याचिकाएं हैं। हमें अभी तक 60 ही मिली हैं। हम उन्हीं पर जवाब दे पाए हैं। जब बाकी मिलेंगी तो जवाब देंगे।’
  2. सुप्रीम कोर्ट ने असम, पूर्वोत्तर और उत्तर प्रदेश से जुड़ी याचिकाओं के लिए अलग-अलग पीठ बनाई है, जो सिर्फ इनसे जुड़ी याचिका ही सुनेगी। विकास सिंह और इंदिरा जयसिंह द्वारा सुप्रीम कोर्ट में अपील की गई कि, असम का मसला पूरी तरह से अलग है, इसलिए उनको जल्द से जल्द सुना जाए। केंद्र सरकार को असम से जुड़ी याचिकाओं का जवाब 4 हफ्ते में देना होगा।
  3. वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने अपील की है कि, इस मामले को संवैधानिक पीठ को सौंपा जाए। उन्होंने कहा कि, ‘आज आप यह तय कर दीजिए कि मामला संविधान पीठ में जाए या नहीं। हम रोक नहीं मांग रहे लेकिन नागरिकता देकर उसे वापस नहीं ले सकते। इसलिए कुछ आदेश होना चाहिए।
  4. सुप्रीम कोर्ट में यह भी अपील की गई है कि, कोई हाई कोर्ट नागरिकता संशोधन कानून को लेकर सुनवाई ना करे। इसपर कोर्ट ने आदेश दिया है कि कोई भी हाई कोर्ट इस मसले पर सुनवाई नहीं करेगी।
  5. वकीलों ने अपील की है कि, इस कानून पर तुरंत रोक लगाईं जाए, लेकिन चीफ जस्टिस ने कहा कि, ‘इसपर सिर्फ संवैधानिक पीठ ही फैसला ले सकती है। जो कि पांच जजों की होगी।’
  6. बता दें इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में कोई भी नई याचिका दायर की जा सकती है। लेकिन केंद्र ने नई याचिकाओं पर रोक लगाने की मांग की है।
  7. सुप्रीम कोर्ट ने नागरिकता कानून पर तुरंत रोक लगाने से इनकार कर दिया और कहा कि, फिलहाल सभी याचिकाओं को सुना जाना है। कोर्ट ने कहा कि, ‘किसी एक याचिका को सुनकर तुरंत रोक नहीं लगाई जा सकती है।’
  8. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद याचिकाकर्ता तहसीन पूनावाला ने कहा कि, ‘हम इसलिए रोक लगाने की मांग कर रहे थे कि यूपी में सरकार ने प्रक्रिया शुरू कर दी है। अगर किसी को नागरिकता दे दी गई तो फिर उससे वापस नहीं ली जा सकती। मुझे इस बात से कोई आपत्ति नहीं कि यह बेंच फैसला दे या संविधान पीठ फैसला दे, लेकिन इस कानून के अमल में आने से पहले इसके नियम कायदे जरूर बन जाने चाहिए।’
  9. एक याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि लोगों की नागरिकता सरकारी बाबुओं के भरोसे छोड़ दी जाएगी। लेकिन एटॉर्नी जनरल ने इसका विरोध किया। इसके बाद उन्होंने असम से जुड़े मामलों को अलग से सुनने की मांग की।
  10. जानकारी के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट में नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ कुल 142 याचिकाएं दायर की गई थीं। इसके अलावा एक याचिका इसके पक्ष में थी और एक याचिका केंद्र सरकार की ओर से दायर की गई थी।

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