शंख, थाली और ताली बजाने का है धार्मिक और वैज्ञानिक महत्‍व, इससे खत्म होते हैं कीटाणु

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चैतन्य भारत न्यूज

22 मार्च को सुबह से ही पूरे देश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर जनता कर्फ्यू लगा। इस कर्फ्यू के साथ प्रधानमंत्री ने शाम 5 बजे लोगों से घर की छत पर, बालकनी में और घर के दरवाजे, खिड़कियों पर आकर ताली, थाली बजाने की भी अपील की थी। पूरे देश ने पीएम मोदी की इस अपील का पालन किया। बता दें घंटी, थाली व ताली बजाने की धार्मिक मान्यता के साथ-साथ वैज्ञानिक असर भी जुड़ा हुआ है।



वैज्ञानिकों का कहना है कि जब घंटी बजाई जाती है तो वातावरण में कंपन पैदा होता है, जो वायुमंडल में काफी दूर तक जाता है। इस कंपन का फायदा यह है कि इसके क्षेत्र में आने वाले सभी कीटाणु व विषाणु आदि नष्ट हो जाते हैं, जिससे आसपास का वातावरण शुद्ध हो जाता है। ऐसे में कोरोना से सतर्क रहने के संकेत के लिए घंटी और अच्छी शुरुआत के लिए थाली व ताली बजाई गई। धार्मिक नजरिए से देखा जाए तो मंदिरों में घंटी लगी होती है। यह घंटी ऐसी जगह पर लगाई जाती है कि मंदिर में आने-जाने वाला हर व्यक्ति इसका इस्तेमाल कर सके। वहीं घर में अच्छी पहल या शुरुआत होने के अवसर पर थाली और ताली बजाई जाती है। इससे सकारात्मक माहौल बनता है। वहीं जीत के लिए भी उत्साह बढ़ाने के लिए ताली बजाई जाती है।

ताली बजाने से 29 एक्यूप्रेशर पॉइंट्स पर पड़ता है दबाव

वैज्ञानिकों के मुताबिक, ‘हमारे शरीर के 29 एक्यूप्रेशर पॉइंटस हमारे हाथों में होते है। प्रेशर पॉइंट को दबाने से संबंधित अंग तक रक्त और ऑक्सीजन का संचार अच्छे से होने लगता है। एक्यूप्रेशर के अनुसार इन सभी दबाव बिंदु को सही तरीके से दबाने का सबसे सहज तरीका है ताली। हथेली पर दबाव तभी अच्छा बनता है जब ताली बजाते हुए हाथ लाल हो जाए, शरीर से पसीना आने लगे। इससे आंतरिक अंगों में ऊर्जा भर जाती है और सभी अंग सही ढंग से कार्य करने लग जाते हैं। साथ ही घंटी बजाने से वातावरण में मौजूद जीवाणु, विषाणु आदि का नाश होता है।

शंख ध्वनि से नष्ट होते हानिकारण कीटाणु

आयुर्वेद विशेषज्ञ बताते हैं कि ध्वनी पैदा करने की इस पद्धति में भी विज्ञान ने शोध कार्य और परीक्षणों का सहारा लिया। नासा के माने तो ध्वनी पैदा करने से खगोलीय ऊर्जा का उत्सर्जन होता है। जो जीवाणु का नाश कर लोगों में ऊर्जा व शक्ति का संचार करता है। इसमें शंख बजाने को खासा महत्व दिया गया है क्योंकि शंख बजाने से आतंरिक और बाहरी दोनों वातावरण प्रभावित होते हैं। वैज्ञानिकों के मुताबिक, शंख की आवाज से वातावरण में मौजूद कई तरह के जीवाणुओं-कीटाणुओं का नाश हो जाता है। कई टेस्ट से इस तरह के नतीजे सामने आए हैं। शंख की आवाज जहां तक जाती हैं वहां तक सभी हानिकारक कीटाणुओं का नाश हो जाता है।

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