कांग्रेस के दिग्गज नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने छोड़ी पार्टी, 20 कांग्रेस विधायकों का भी इस्तीफा, मप्र की कमलनाथ सरकार संकट में

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चैतन्य भारत न्यूज

भोपाल। मध्यप्रदेश में करीब आठ दिन से चल रहा सियासी संकट मंगलवार को और गहरा गया। कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने पार्टी छोड़ दी। उन्होंने अपना इस्तीफा कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को भेज दिया। इसी के साथ कल से बेंगलुरू में डेरा डाले 19 कांग्रेस विधायकों ने भी विधानसभा की सदस्यता से अपना इस्तीफा दे दिया। एक अन्य कांग्रेस विधायक बिसाहूलाल सिंह ने मंगलवार दोपहर विधानसभा की सदस्यता से त्यागपत्र देकर भाजपा की सदस्यता ले ली। इस तरह कांग्रेस के 20 विधायकों का इस्तीफा होने से कमलनाथ सरकार का संकट गहरा गया है और उसका गिरना तय माना जा रहा है।

मध्य प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनने के करीब 15 महीने बाद सिंधिया ने यह कदम उठाया। वे लगातार हो रही अपनी उपेक्षा से नाराज बताए जा रहे थे। जल्दी ही होने वाले राज्यसभा चुनाव को लेकर हुई रस्साकशी ने इस उपेक्षा को इस्तीफे की कगार पर पहुंचा दिया। सिंधिया ने सोनिया गांधी को नौ मार्च को भेजे अपने इस्तीफे में लिखा कि मैं 18 सालों से कांग्रेस में हूं। शुरू से मेरा उद्देश्य प्रदेश और देश के लोगों की सेवा करना रहा है लेकिन मुझे महसूस हो रहा है कि कांग्रेस के साथ मैं इस काम में खुद को असमर्थ पा रहा हूं। हालांकि कांग्रेस ने भी उन्हें पार्टी से निकालने का पत्र जारी कर इस मामले में अपनी साख बचाने की कोशिश की। कांग्रेस ने उन पर पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाया।

उधर, सिंधिया के कट्टर समर्थक माने जाने वाले 19 विधायकों ने भी इस घटनाक्रम के बाद विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। ये विधायक सोमवार से ही बेंगलुरू में डेरा डाले हुए हैं। इनमें छह मंत्री हैं। इनके इस्तीफे के बाद सीएम कमलनाथ ने राज्यपाल को पत्र लिखकर इन छह मंत्रियों इमरती देवी, तुलसी सिलावट, गोविंद सिंह राजपूत, महेंद्र सिंह सिसोदिया, प्रद्युम्नसिंह तोमर और डॉ. प्रभुराम चौधरी को बर्खास्त करने की मांग कर दी।

कमलनाथ सरकार के पास नहीं रहा बहुमत

होली के दिन हुए इस बडे राजनीतिक धमाके ने मध्यप्रदेश की कमलनाथ सरकार को अस्थिर कर दिया है। कांग्रेस के पास बहुमत लायक विधायकों की संख्या भी नहीं बची है। 230 सदस्यीय विधानसभा में दो सीटें रिक्त हैं। इस्तीफे के पहले कांग्रेस के 114 विधायक थे लेकिन 20 विधायकों का इस्तीफा आ चुका है यानी कांग्रेस के पास 94 विधायक ही हैं। जबकि भाजपा के 107 विधायक हैं। सपा का एक, बसपा के दो और चार निर्दलीय विधायक हैं जो फिलहाल कमलनाथ सरकार के साथ हैं।

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