UP चुनाव से पहले बड़ा उलटफेर: कांग्रेस छोड़ भाजपा में शामिल हुए जितिन प्रसाद, उनके पिता ने भी की थी पार्टी से बगावत

चैतन्य भारत न्यूज

ज्योतिरादित्य सिंधिया के बाद कांग्रेस सांसद राहुल गांधी की टीम से एक और बेहद अहम विकेट गिरा है। पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री जितिन प्रसाद आज बीजेपी में शामिल हो गए। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने जितिन प्रसाद को पार्टी में शामिल करवाया। बताया जा रहा है कि कांग्रेस के बड़े ब्राह्मण चेहरों में से एक जितिन प्रसाद पिछले कुछ समय से पार्टी हाईकमान से नाराज चल रहे थे। उत्तर प्रदेश चुनाव से पहले यह बड़ा सियासी उलटफेर है।

जितिन प्रसाद को बीजेपी में शामिल कराने के बाद केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि यूपी की राजनीति में जितिन प्रसाद की भूमिका अहम होने वाली है। वहीं, जितिन प्रसाद ने कहा कि मैंने 7-8 साल में अनुभव किया कि असल मायने में कोई संस्थागत राजनीतिक दल है, वो भारतीय जनता पार्टी है, बाकी दल तो व्यक्ति विशेष और क्षेत्र के हो गए हैं।

कौन हैं जितिन प्रसाद?

48 वर्षीय जितिन प्रसाद यूपी में कांग्रेस के लिए एक युवा चेहरा थे। उनका जन्म 29 नवंबर 1973 को हुआ था। उनके पिता जितेंद्र प्रसाद कांग्रेस के दिग्गज नेता थे। जितेंद्र प्रसाद दो पूर्व प्रधानमंत्रियों राजीव गांधी और पीवी नरसिम्हा राव के सलाहकार रह चुके थे। इसके साथ ही जितेंद्र प्रसाद कांग्रेस के उपाध्यक्ष भी रह चुके थे। बता दें जितेंद्र प्रसाद ने भी कभी सोनिया गांधी की बगावत की थी। नवंबर 2000 में जितेंद्र प्रसाद ने सोनिया गांधी के खिलाफ कांग्रेस अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ा था। हालांकि, वो हार गए थे। इसके बाद जनवरी 2001 में उनका निधन हो गया।

जितिन प्रसाद का राजनीतिक जीवन

जितिन प्रसाद 2001 में भारतीय युवा कांग्रेस में सचिव बने। 2004 में अपने गृह लोकसभा सीट, शाहजहांपुर से 14वीं लोकसभा चुनाव में किस्मत आजमायी और जीते। पहली बार जितिन प्रसाद को 2008 में केन्द्रीय राज्य इस्पात मंत्री नियुक्त किया गया।
उसके बाद सन् 2009 में जितिन प्रसाद 15 वीं लोकसभा चुनाव लोकसभा धौरहरा से लड़े और 184,509 वोटों से विजयी भी हुए। जितिन प्रसाद 2009 से जनवरी 2011 तक सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, 19 जनवरी 2011 से 28 अक्टूबर 2012 तक पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय और 28 अक्टूबर 2012 से मई 2014 तक मानव संसाधन एवं विकास मंत्रालय, यूपीए सरकार में केन्द्रीय राज्यमंत्री रहें हैं। जितिन प्रसाद शाहजहांपुर, लखीमपुर और सीतापुर में काफी लोकप्रिय नेता हैं। जितिन प्रसाद को उत्तर प्रदेश में शांतिप्रिय व विकासवादी राजनीती के लिए जाना जाता है। जितिन प्रसाद ने 2014 का लोकसभा चुनाव धौरहरा सीट से लड़ा, लेकिन हार गए। 2017 के विधानसभा चुनाव में शाहजहांपुर की तिलहर विधानसभा सीट से खड़े हुए, लेकिन वहां से भी हार गए। इसके बाद 2019 में धौरहरा से फिर लोकसभा चुनाव लड़े, लेकिन हार गए। इसके बाद से ही प्रियंका गांधी ने जितिन प्रसाद को महत्व नहीं दिया, जिसके चलते वह नाराज चल रहे थे।

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