कांग्रेस सांसद गुलाम नबी आजाद की राज्यसभा से विदाई, पीएम मोदी की आंखें हुईं नम, तारीफों के बांधे पुल

चैतन्य भारत न्यूज

संसद के ऊपरी सदन से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद सहित चार सांसदों की विदाई हो रही है। मंगलवार को सदन में पीएम नरेंद्र मोदी समेत अन्य दलों के नेताओं ने गुलाम नबी आजाद की प्रशंसा करते हुए उन्हें भविष्य के लिए बधाई दी। आजाद ने भी सभी का शुक्रिया अदा करते हुए अपने लंबे राजनीतिक अनुभवों को कुछ किस्सों के जरिए साझा किया।

गुलाम नबी ने कहा कि, उन्होंने देशभक्ति महात्मा गांधी, जवाहर लाल नेहरू और मौलाना आजाद को पढ़कर सीखी है। गुलाम नबी ने पूर्व पीएम इंदिरा गांधी और संजय गांधी का शुक्रिया अदा करते हुए कहा कि, उनकी वजह से मैं यहां तक पहुंच पाया। इसके साथ ही गुलाम नबी ने बताया कि कश्मीर के हालात पहले कैसे हुआ करते थे और अब कितना बदलाव आ गया है। साथ ही पाकिस्तान के बारे में भी अपनी राय रखी।

गुलाम नबी ने सदन में बताया, ‘मैं कश्मीर के सबसे बड़े SP कॉलेज में पढ़ता था। वहां 14 अगस्त और 15 अगस्त दोनों मनाया जाता था। 14 अगस्त (पाकिस्तान का स्वतंत्रता दिवस) मनाने वालों की संख्या ज्यादा थी। मैं और मेरे कुछ साथी 15 अगस्त मनाते थे और ऐसे लोग बहुत कम थे। लेकिन उसके बाद हम एक हफ्ता कॉलेज नहीं जाते थे क्योंकि वहां पिटाई होती थी। उस वक्त से निकलकर हम यहां तक पहुंचे हैं।’

गुलाम नबी ने कहा, ‘मैं उन खुशकिस्मत लोगों में हूं जो पाकिस्तान कभी नहीं गया, लेकिन जब मैं पढ़ता हूं वहां किस तरह के हालात हैं तो मुझे फख्र महसूस होता है कि हम हिंदुस्तानी मुसलमान हैं। विश्व में अगर किसी मुसलमान को गौरव होना चाहिए तो हिंदुस्तान के मुसलमानों को होना चाहिए।’

आजाद ने कहा कि, ‘पिछले 30-35 सालों में अफगानिस्तान से लेकर इराक तक, कुछ सालों पहले देखें तो मुस्लिम देश एक-दूसरे से लड़ाई करते हुए खत्म हो रहे हैं, वहां कोई हिंदू या ईसाई नहीं है, वो लोग आपस में ही लड़ रहे हैं। गुलाम नबी ने कहा कि पाकिस्तान के समाज में जो बुराइयां हैं, खुदा करे वो हमारे मुसलमानों में कभी न आए।’

इसके अलावा गुलाम नबी ने कहा कि, ‘सीएम बनने के बाद मैंने पहले जनसभा सोपोर में की, जहां से गिलानी साहब तीन बार विधायक चुने गए थे। उस मीटिंग में मैंने कहा था कि मेरी सरकार का कोई मंत्री धर्म या मस्जिद या पार्टी की बुनियाद पर इंसाफ करेगा तो मुझे शर्म आएगा कि कोई मंत्री या अफसर मेरे साथ काम करेगा।’

प्रधानमंत्री ने की तारीफ

गुलाम नबी की तारीफ करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि, ‘गुलाम नबी जी जब मुख्यमंत्री थे, तो मैं भी एक राज्य का मुख्यमंत्री था। हमारी बहुत गहरी निकटता रही। एक बार गुजरात के कुछ यात्रियों पर आतंकवादियों ने हमला कर दिया, 8 लोग उसमें मारे गए। सबसे पहले गुलाम नबी जी का मुझे फोन आया। उनके आंसू रुक नहीं रहे थे। गुलाम नबी जी लगातार इस घटना की निगरानी कर रहे थे। वे उन्हें लेकर इस तरह से चिंतित थे जैसे वे उनके परिवार के सदस्य हों। मैं श्री आजाद के प्रयासों और श्री प्रणब मुखर्जी के प्रयासों को कभी नहीं भूलूंगा। उस समय प्रणब मुखर्जी जी रक्षा मंत्री थे। मैंने उनसे कहा कि अगर मृतक शवों को लाने के लिए सेना का हवाई जहाज मिल जाए तो उन्होंने कहा कि चिंता मत करिए मैं करता हूं व्यवस्था। वहीं गुलाम नबी जी उस रात को एयरपोर्ट पर थे।’

सदन में जब बोलते-बोलते रुक गए प्रधानमंत्री

राज्यसभा में गुलाम नबी आजाद के योगदान का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री मोदी भावुक हो गए। प्रधानमंत्री इतने भावुक हुए की बोलते-बोलते रुक गए। उन्होंने अपने आंसू पोछे। फिर टेबल पर रखे गिलास से पानी पिया और कहा सॉरी। इसके बाद उन्होंने फिर अपना संबोधन शुरू किया।

राज्यसभा में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, पद आते हैं, उच्च पद आते हैं, सत्ता आती है और इन्हें किस तरह से संभालना है, यह गुलाम नबी आजाद जी से सीखना चाहिए। मैं उन्हें सच्चा दोस्त समझूंगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि उनके एक जुनून के बारे में बहुत से लोग नहीं जानते हैं, वो है बागवानी। वो यहां के घर में बगीचे को संभालते हैं, जो कश्मीर की याद दिलाता है।

 

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