कांग्रेस के बागी विधायकों ने की प्रेस कांफ्रेंस, कहा- सीएम कमलनाथ घमंड में आ गए, हमें मजबूरी में साथ छोड़ना पड़ा

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चैतन्य भारत न्यूज

बेंगलुरु. मध्यप्रदेश में पिछले दो सप्ताह से जारी सियासी घमासान चरम पर है। इसी बीच मंगलवार को बेंगलुरु में मौजूद कांग्रेस के बागी विधायकों ने सुबह 9:30 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस की। बागी विधायकों का कहना है कि, उन्हें किसी ने भी बंधक नहीं बनाया है। वह अपनी मर्जी से बेंगलुरु आए हैं।



बता दें बेंगलुरु के रिसोर्ट में कांग्रेस से बगावत कर चुके 16 विधायक रुके हुए हैं। इन सभी ने राज्यपाल लालजी टंडन को अपना इस्तीफा भेज दिया है। हालांकि, अभी तक इनका इस्तीफा स्वीकार नहीं हुआ है। विधायकों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि, ‘हमारे नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया हैं।’ उनका यह भी कहना है कि, ‘अभी उन्होंने बीजेपी में जाने पर फैसला नहीं लिया है, वे इसपर विचार करने के बाद फैसला करेंगे।’

मजबूरी में छोड़ना पड़ा साथ

बागी विधायकों ने कहा कि, ‘हमें मजबूरी में साथ छोड़ना पड़ा। हम कमलनाथ सरकार की कार्यशैली से खुश नहीं है। हम बंधक नहीं हैं, अपनी इच्छा से यहां आए हैं। हम सभी विधायक एक साथ हैं। 22 विधायक इस प्रेस कांफ्रेस में मौजूद हैं। जब सभी ने इस्तीफा दिया तो केवल छह के मंजूर क्यों हुए।?’

मांगी सुरक्षा

उन्होंने सुरक्षा की मांग करते हुए कहा कि, ‘मीडिया में जो कहा जा रहा कि हम लोग यहां बंधक हैं, ऐसा कुछ भी नहीं है। जब सिंधिया जी जैसे बड़े नेता पर हमला हो सकता है, तो हम लोग कैसे मध्यप्रदेश में सुरक्षित रह सकते हैं। इसलिए हम विधायक यहां बंगलूरू में हैं। हम सभी को केंद्रीय सुरक्षा मिलनी चाहिए।’

CM के पास बात सुनने का समय नहीं

विधायकों का कहना है कि, ‘हम सभी ने मिलकर मध्यप्रदेश में सरकार बनाई थी। मुख्यमंत्री के पास हमारी बात सुनने का समय नहीं है। हम भाजपा में शामिल होने पर विचार कर रहे हैं। एमपी में मंत्रियों, विधायकों से शक्तिशाली अधिकारी हैं। हम लोगों को न्याय नहीं मिला है। राज्य को सबसे बड़ा माफिया चला रहे हैं।’

सरकार बनाने में सिंधिया की अहम भूमिका

बागी कांग्रेस विधायक और पूर्व कैबिनेट मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने कहा कि, ‘राज्य में मुख्यमंत्री के लिए कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया दो चेहरे थे। ये पूरा प्रदेश जानता है कि मध्य प्रदेश की सरकार बनने में सिंधिया जी की अहम भूमिका थी। सिंधिया जी को मुख्यमंत्री न बनाकर कमलनाथ को बनाया हमें लगा था कि सब ठीक-ठाक रहेगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ।’

छिंदवाड़ा को आवंटित किए हजारों करोड़

उन्होंने आगे कहा कि, ‘जो व्यवहार कमलनाथ जी का हमने देखा मैं मंत्री रहते कह सकता हूं कि उन्होंने कभी भी हमें 15 मिनट भी शांतिपूर्वक नहीं सुना। हम अपनी मर्जी से यहां आए हैं।’ उन्होंने सीएम कमलनाथ पर यह आरोप भी लगाया है कि, ‘कैबिनेट ने सिर्फ छिंदवाड़ा को ही हजारों करोड़ रुपए आवंटित किए। हमने मुख्यमंत्री से कहा कि केवल इस पर चुनाव नहीं जीता जा सकता।’

सिंधिया ही हमारे नेता

वहीं कांग्रेसी विधायक इमरती देवी ने कहा कि, ‘मैं आज जो भी हूं, सिंधिया जी की वजह से हूं। सरकार ने वचनपत्र तैयार किया था, उस पर कोई अमल नहीं हुआ। ज्योतिरादित्य सिंधिया हमारे नेता हैं। उन्होंने हमें बहुत कुछ सीखाया है। मैं हमेशा उनके साथ रहूंगी फिर चाहे मुझे कुएं में हीं क्यों न कूदना पड़े।’

कमलनाथ के व्यवहार से दुखी

विधायक बिसाहूलाल सिंह ने कहा, ‘राहुल गांधी से बड़ा कोई नेता कांग्रेस में नहीं था। मैंने मुख्यमंत्री पद को लेकर उनसे बात की थी। सिंधिया को मुख्यमंत्री बनाने के लिए कहा था। आज सबसे बड़ा माफिया प्रदेश को चला रहा है। कमलनाथ के व्यवहार से दुखी हूं। आदिवासियों के हित में कोई काम नहीं हुआ।’

कमलनाथ के झूठे वादें

विधायक राजवर्धन सिंह ने कहा, ‘मैं अपने क्षेत्र की जनता के दम पर विधायक हूं। कमलनाथ ने मुझसे कहा था कि सब पर भरोसा किया है तो मुझ पर भी करके देखो। 6 महीने में इलाके सूरत बदल जाएगी। लेकिन कुछ नहीं हुआ।’

कमलनाथ घमंड में आ गए

विधायक हरदीप सिंह डंग ने बोला कि, ‘मंदसौर कांड के वक्त में आगे आया था। राहुल गांधी जब वहां गए तो उन्होंने मुझे पहचाना तक नहीं। सत्ता में आने के बाद कमलनाथ समेत अन्य कांग्रेस नेता घमंड में आ गए थे। कार्यकर्ताओं की बात तो छोड़ो अधिकारी मंत्रियों की बात तक नहीं सुन रहे। दिग्विजय सिंह और कमलनाथ कह रहे हैं कि विधायकों को पैसा मिला है। अगर ऐसा है तो आपकी सरकार है, छापे मारो और पता कर लो।’

सज्जन सिंह वर्मा के कारण छोड़ी पार्टी

मनोज चौधरी ने कहा कि, ‘मंत्री सज्जन सिंह वर्मा के कारण पार्टी छोड़ी है। कोई एक काम मंजूर नहीं किया गया।’ रक्षा सरोनिया ने कहा, ‘मैं बहुत ज्यादा परेशान हो गई थी, मेरी बात तक नहीं सुनी गई। हमने जनता के लिए फैसला लिया है।’

फ्लोर टेस्ट से भाग रही सरकार

एक और विधायक ने कहा कि, ‘मुख्यमंत्री फ्लोर टेस्ट कराएं। हम भोपाल जाएंगे। हम उपचुनाव के लिए भी तैयार हैं। सरकार कोरोनावायरस का डर दिखाकर फ्लोर टेस्ट से भाग रही है। अगर संक्रमण फैलने की इतनी ही चिंता है तो फिर वल्लभ भवन (सेक्रेटरियट) में छुट्टी क्यों नहीं की जा रही?’

बागी विधायकों का हुआ मेडिकल टेस्ट

बता दें सोमवार को मध्यप्रदेश विधानसभा में राज्यपाल लालजी टंडन के आदेश पर फ्लोर टेस्ट होना था। इसके चलते सभी 22 बागी विधायकों का मेडिकल फिटनेस कराया गया। उनके कोरोना टेस्ट की स्क्रीनिंग के लिए भी 5 वरिष्ठ डॉक्टरों की टीम 30 से ज्यादा किट लेकर पहुंची थी। सभी बागी विधायकों का ब्लड प्रेशर, शुगर और हीमोग्लोबिन टेस्ट कराया गया। कुछ विधायक ने बेचैनी की शिकायत की थी। इसके बाद डॉक्टरों ने सभी को फिट घोषित कर दिया। सभी विधायकों के मेडिकल सर्टिफिकेट भोपाल पहुंच गए हैं।

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