जून में कांग्रेस को मिलेगा नया अध्यक्ष, CWC की बैठक में बागियों पर भड़के गहलोत, कहा- सोनिया गांधी के नेतृत्व पर भरोसा नहीं है क्या?

चैतन्य भारत न्यूज

नई दिल्ली. कांग्रेस में अध्यक्ष पद को लेकर मचे घमासान के बीच कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) की बैठक हुई। कोरोना महामारी के कारण सीडब्ल्यूसी ने डिजिटल तरीके से बैठक की। बैठक में नेताओं की ओर से जल्द आंतरिक चुनाव करने की अपील की गई। सूत्रों के अनुसार नए कांग्रेस अध्यक्ष के लिए जून में चुनाव हो सकते हैं। फिलहाल सोनिया गांधी पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल रही हैं।

पार्टी सूत्रों के मुताबिक, मई में पार्टी संगठन के चुनाव हो सकते हैं। अध्यक्ष को लेकर विरोध के सुर उठने के बाद CWC की पिछली बैठक में तय हुआ था कि पार्टी संगठन के चुनाव करवाए जाएं। मई 2019 में राहुल गांधी के कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने के बाद सोनिया गांधी अंतरिम अध्यक्ष बनी थीं। कांग्रेस नेताओं का एक गुट मांग कर रहा है कि फुल टाइम प्रेसिडेंट चुना जाए, जो एक्टिव भी रहे।


वहीं राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत बागियों पर भड़क गए। अशोक गहलोत ने कहा कि चुनाव की इतनी जल्दी क्यों हैं, क्या नेताओं को सोनिया गांधी के नेतृत्व पर भरोसा नहीं है? कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक में अशोक गहलोत करीब 15 मिनट तक बोले। जहां उन्होंने कहा कि, ‘आज किसान आंदोलन, महंगाई, अर्थव्यवस्था जैसे कई मसले चल रहे हैं, ऐसे में इनपर फोकस करना जरूरी है और संगठन के चुनाव बाद में भी कराए जा सकते हैं।’ जल्द संगठन का चुनाव कराने वालों को गहलोत ने कहा कि क्या उन्हें सोनिया गांधी के नेतृत्व पर भरोसा नहीं है।

राष्ट्रवाद का प्रमाणपत्र बांटने वाले हुए बेनकाब: सोनिया

बैठक में सोनिया गांधी ने रिपब्लिक टीवी के प्रधान संपादक अर्नब गोस्वामी की कथित वायरल वाट्सएप चैट को लेकर कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा से पूरी तरह से समझौता किया गया। सरकार ने इसपर चुप्पी साधी हुई है। उन्होंने अर्थव्यवस्था को लेकर केंद्र सरकार पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि सरकार निजीकरण को लेकर हड़बड़ी में है। कोरोना टीकाकरण पर कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि आशा है कोविड टीकाकरण की प्रक्रिया जारी रहेगी और इसे पूरा किया जाएगा। सीडब्ल्यूसी की बैठक में उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि सरकार ने किसान संगठनों के साथ बातचीत के नाम पर हैरान करने वाली असंवेदनशीलता और अहंकार दिखाया है।

सोनिया ने कहा, ‘एक सप्ताह में संसद सत्र आरंभ होने जा रहा है। यह बजट सत्र है, लेकिन जनहित के कई ऐसे मुद्दे हैं जिन पर पूरी तरह चर्चा किए जाने की जरूरत है। क्या सरकार इस पर सहमत होती है, यह देखने होगा।’ केंद्रीय कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के आंदोलन का उल्लेख करते हुए उन्होंने आरोप लगाया, ‘किसानों का आंदोलन जारी है और सरकार ने बातचीत के नाम पर हैरान करने वाली असंवेदनशीलता और अहंकार दिखाया है।’

उन्होंने यह भी कहा, ‘यह स्पष्ट है कि कानून जल्दबाजी में बनाए गए और संसद को इनके प्रभावों का आकलन करने का अवसर नहीं दिया गया। हम इन कानूनों को खारिज करते हैं क्योंकि ये खाद्य सुरक्षा की बुनियादों को ध्वस्त कर देंगे।’

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