गुजरात: पिछले 71 दिनों में 1.23 लाख डेथ सर्टिफिकेट जारी हुए, लेकिन सरकार बता रही कोरोना से सिर्फ 4,218 मौतें

चैतन्य भारत न्यूज

गुजरात में कोरोना वायरस से होने वाली मौते के आंकड़ें लगातार बढ़ते जा रहे हैं। अहमदाबाद, सूरत, राजकोट, भावनगर, जामनगर हर जगह शवों की लाइनें लग रही हैं। लेकिन फिर भी सरकार कोरोना से मरने वालों के आंकड़ें बेहद कम बता रही हैं।

सवा लाख मौतें छिपाई गई

जब इस बारे में समाचार समूह दैनिक भास्कर ने पड़ताल की हैरान कर देने वाली जानकारी सामने आई। इसमें पता चला कि 1 मार्च 2021 से 10 मई 2021 तक राज्य के 33 जिलों और 8 निगमों द्वारा सिर्फ 71 दिनों में ही 1 लाख 23 हजार 871 डेथ सर्टिफिकेट जारी किए जा चुके हैं। जबकि सरकारी आंकड़ों में कोरोना से मरने वालों की संख्या सिर्फ 4,218 ही बताई गई है। अब सवाल यह उठता है कि 71 दिनों में सवा लाख लोगों की मौत कैसे हो गई।

पिछले साल की तुलना में इस साल दोगुनी मौतें

डेथ सर्टिफिकेट्स के मुताबिक, इस साल मार्च महीने में ही राज्य में 26,026, अप्रैल में 57,796 और मई महीने के शुरुआती 10 दिनों में ही 40,051 मौतें हुई हैं। अब इन आंकड़ों की तुलना 2020 से करें तो मार्च 2020 में 23,352, अप्रैल 2020 में 21,591 और मई 2020 में 13,125 मौतें दर्ज की गई थीं। यानी कि पिछले साल की तुलना में इस साल के 71 दिनों में ही मरने वालों का आंकड़ा दोगुना हो चुका है।

सीएम रुपाणी ने दिया था बयान

मृतकों के सही आंकड़े छिपाने के आरोप लगने पर गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने कहा था कि, सरकार मौतों के आंकड़ों को नहीं छिपा रही है। मौतों में प्राथमिक और द्वितीयक दोनों वजह हैं। जिनकी मौतें को-मॉर्बिडिटी की वजह से हुईं उन्हें कोरोना से मरने वालों में शामिल नहीं किया जा रहा है। यानी की अगर किसी व्यक्ति को कोरोना हुआ है और वह डायबिटीज, हार्ट या किडनी से जुड़ी गंभीर बीमारियों से पीड़ित है तो उसकी मौत कोरोना से नहीं मानी जाती।

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