लॉकडाउन का एक साल: जब लोगों पर टूटा था मुसीबतों का पहाड़, अब इतना बदल गया है संसार

चैतन्य भारत न्यूज

देश को जानलेवा कोरोना वायरस के प्रकोप से बचाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक साल पहले रात 8 बजे देश में लॉकडाउन का ऐलान किया था। उस वक्त कोरोना ने देश पर ऐसा कहर बरपाया कि सब कुछ बंद हो गया था। रेल, हवाईजहाज, बसें, कारखाने, दुकानें और हजारों कंपनियां समेत लगभग सभी जरूरी साधनों को बंद करना पड़ा और लोग घरों में कैद हो गए थे। पूरा भारत ठप हो गया था।

एक तो पहले लॉकडाउन के चलते घर के अंदर बंद और ऊपर से बढ़ती महंगाई। किसी की नौकरी गई, तो किसी का धंधा बंद। यहीं नहीं सैलरी भी घटी, लेकिन महंगाई है कि लगातार बढ़ती जा रही। घर से काम करना, नई तकनीकों को अपने जीवन का हिस्सा बनाना, घर में ज्यादा समय व्यतीत करना, दोस्तों-रिश्तेदारों से आपसी संबंध फिर से प्रगाढ़ बनाना, मनोरंजन के नए तौर-तरीकों को स्वीकार करना, उन चंद बातों में शामिल हैं जो हमने कोरोना महामारी और उसके चलते लगे लॉकडाउन में सीखीं।

वर्क फ्रॉम होम ने लाखाें कर्मचारियों के जीवन पर डाला असर

लॉकडाउन की वजह से ‘वर्क फ्रॉम होम’ यानी घर से ही ऑफिस का काम करने का चलन तेजी से बढ़ा। फ्रंटियर वर्कर्स को छोड़कर सभी पेशे में यह लागू हुआ। लॉकडाउन खुलने के बाद भी आईटी सहित कई सेक्टर कर्मचारियों से घर से काम करा रहे हैं। वर्क फ्रॉम होम जीवन का हिस्सा बन चुका है।

30 जनवरी 2021 को आया था पहला केस

भारत में कोरोना वायरस का पहला केस 30 जनवरी 2020 को आया। दक्षिण राज्य केरल में चीन के वुहान प्रांत से लौटीं एक महिला कोरोना वायरस पॉजिटिव पाई गई। इसके बाद देश में हर रोज केस बढ़ते गए। कोरोना वायरस ने लोगों के रहने सहने के तरीके में बहुत बदलाव ला दिया है। आज एक साल बाद भी भले ही देश लॉकडाउन से आजाद हो गया हो, लेकिन अभी भी कोरोना का खतरा बरकार है। मार्च में केस फिर से बढ़ने लगे हैं। देश में संक्रमण की दूसरी लहर चल रही है, जो बेहद खतरनाक है।

आज देश में कोरोना की क्या स्थिति है?

  • कुल मामले- एक करोड़ 16 लाख 86 हजार 796
  • कुल डिस्चार्ज- एक करोड़ 11 लाख 81 हजार 253
  • कुल एक्टिव केस- तीन लाख 45 हजार 377
  • कुल मौत- एक लाख 60 हजार 166
  • कुल टीकाकरण- 4 करोड़ 84 लाख 94 हजार 594 डोज दी गई हैं।

 

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