कोरोना निगेटिव होने पर अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद भी 14 दिन होम क्वारंटाइन में रहना जरुरी

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चैतन्य भारत न्यूज

लखनऊ. इन दिनों पूरा देश कोरोना जैसे जानलेवा वायरस से लड़ रहा है। इससे निपटने के लिए डॉक्टर भी सभी लोगों को सावधानी बरतने के लिए कह रहे हैं। हाल ही में एक शोध में यह सामने आया है कि कोरोना संक्रमित एक महिला की दो टेस्ट रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद उसे डिस्चार्ज कर दिया गया था। घर जाने के चार से पांच दिन बाद उसके शरीर में फिर से कोरोना के लक्षण दिखने लगे। दोबारा जांच में महिला फिर से कोरोना पॉजिटिव पाई गई। कुछ दिनों के होम क्वारंटाइन के बाद फिर जांच की गई तो जांच रिपोर्ट निगेटिव आई।

यह रिसर्च पेपर इंटरनेशनल जनरल ऑफ इंफेक्शियस डिसीजेज मेंं प्रकाशित केस हिस्ट्री में छापा गया है। इस शोध को देखकर दुनियाभर में कोरोना वायरस को लेकर सावधानी बरतने के सुझाव दिए जा रहे हैं। दरअसल इस गंभीर स्थिति में वैज्ञानिक भी कुछ कहने की स्थिति में नहीं है। कोरोना एक नया वायरस है जिस पर फिलहाल कई तरह के अध्ययन किए जा रहे हैं। इस वजह से डॉक्टर कोरोना निगेटिव मरीज को भी 14 दिन के होम क्वारंटाइन की सलाह दे रहे हैं।

किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू ) के इंफेक्शियस डिजीज हॉस्पिटल के प्रभारी डॉ. हिमांशु ने बताया कि, कोरोना मरीजों की दो रिपोर्ट लगातार निगेटिव आने के बाद उन्हें डिस्चार्ज किया जा रहा है। एक रिपोर्ट के निगेटिव आने के 48 घंटे बाद दूसरी जांच कराई जाती है, ताकि इस प्रक्रिया में अगर कहीं कोई वायरस की संभावना थोड़ी भी बची है तो वह भी समाप्त हो जाए। मरीज और उसके परिवार वालों को डिस्चार्ज करने के बाद इस बात के निर्देश दिए जा रहे हैं कि वह 14 दिन होम क्वारंटाइन में रहकर सभी निर्देशों का सख्ती से पालन करें।

ये सावधानियां बरती जाती हैं

  • डॉ. हिमांशु के मुताबिक, मंगलवार को कोरोना के तीन मरीज डिस्चार्ज हुए। उन्हें डिस्चार्ज करने से पहले लगाने के लिए कहा गया।
  • फिर उन्हें H2O वाइप से क्लीन किया जाता है।
  • उन्हें स्वच्छ कपड़े पहनाए जाते हैं और उनके उतारे गए कपड़ों को इंसीनरेटर में भेज दिया जाता है।
  • कमरे से बाहर निकलने से पहले उन्हें मास्क और शू कवर पहनाया जाता है।
  • वैसे तो मरीजों को एम्बुलेंस से ही घर छोड़ा जाता है लेकिन यदि कोई अपनी गाड़ी से जाना चाहे तो पहले उनकी गाड़ी को
  • हाइपोक्लोराइट सॉल्यूशन स्प्रे कर सैनिटाइज कराया जाता है।
  • घर जाने के बाद भी उनसे गाड़ी को सैनिटाइज करवाने के लिए कहा जाता है।
  • मरीजों को सलाह दी जाती है कि घर जाकर सबसे पहले नहाएं और फिर अपने कपड़ों को 0.5 फीसदी ब्लीचिंग पाउडर डालकर 70
  • डिग्री सेल्सियस पर गर्म किए हुए पानी में धोएं।
  • साथ ही मोबाइल, लैपटॉप, घड़ी ,चश्मा आदि को भी सैनिटाइज करें।
  • वे अपने घर में एक कमरे मेें कम से कम 14 दिन तक आइसोलेशन में रहे। यह उनके और उनके परिवार के लिए बहुत जरूरी है।

घर वालों की होती है काउंसलिंग

मरीज को डिस्चार्ज करने से पहले उसके घरवालों की भी काउंसलिंग की जाती है। परिवार के लोगों को सावधानी के तौर पर तीन सप्ताह के लिए हाइड्रोक्सी क्लोरोक्विन दवा दी जाती है। उन्हें पहले दिन सुबह-शाम दो गोली और फिर हफ्ते में एक बार एक गोली खाने की सलाह दी जाती है। यह गोली सिर्फ संकर्मित व्यक्ति परिवार वालों को ही दी जाती है। सामान्य व्यक्ति इसका सेवन नहीं कर सकते हैं।

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