कोरोना के नए रूप ‘Happy Hypoxia’ से सावधान, न सांस फूलना, न कोई लक्षण, महज 48 घंटे में हो जाती है मौत

चैतन्य भारत न्यूज

कोरोना वायरस की दूसरी लहर में युवाओं के गंभीर लक्षणों और मौतों के कई मामले सामने आ रहे हैं। संक्रमण की वजह से लोगों में सर्दी, बुखार, जुकाम, गले में खराश के साथ ही ऑक्सीजन का स्तर गिरने लगता है। हैरान करने वाली बात ये है कि इस बार संक्रमण इस कदर लोगों को अपनी चपेट में ले रहा है कि उन्हें पता ही नहीं लग रहा कि कब इसकी गिरफ्त में आ गए हैं। लेकिन, इस बार संक्रमितों में ‘हैप्पी हाईपॉक्सिया’ की समस्या सामने आ रही है।

मरीज में ऑक्सीजन का स्तर गिरता है पर इसका आभास उसे नहीं होता है। हैप्पी-हाइपोक्सिया के चलते स्थिति क्रिटिकल हो जाती है। इसमें रोगी के खून में ऑक्सीजन की मात्रा कम होने लगती है। लेकिन उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता और संवेदनशीलता की वजह से इसका पता नहीं चलता है। बस बुखार, थकान और कमजोरी जैसा महसूस होता है। रोगी का ऑक्सीजन का लेवल धीरे धीरे कम होने लगता है, जबकि उसे सांस फूलने का अहसास भी नहीं होता है। यही वजह है कि हैप्पी हाइपोक्सिया को ‘साइलेंट किलर’ भी कहा जा रहा है।

क्या है हैप्पी हाइपोक्सिया

हैप्पी हाइपोक्सिया का मतलब होता है कि खून में ऑक्सीजन के स्तर का बहुत कम हो जाना और मरीज को इसका पता भी नहीं चल पाना। दरअसल, कोरोना मरीजों में शुरुआती स्तर पर कोई लक्षण नहीं दिखता या फिर हल्का लक्षण दिखता है, वे बिल्कुल ठीक और ‘हैप्पी’ नजर आते हैं, लेकिन अचानक से उनका ऑक्सीजन सेचुरेशन घटकर 50 फीसदी तक पहुंच जा रहा है, जो जानलेवा साबित हो रहा है।

कैसे बच सकते हैं?

विशेषज्ञ बताते हैं कि कोरोना की दूसरी लहर में हैप्पी हाइपोक्सिया के कारण करीब 5 फीसद मौतें हुई हैं। समय-समय पर शरीर के ऑक्सीजन स्तर की जांच करके इस स्थिति से बचा जा सकता है। गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज व जिले के अन्य निजी अस्पतालों में कोरोना के चलते मौत का आंकड़ा 500 से ऊपर पहुंच चुका है। इसमें पांच फीसद मरीज हैप्पी हाइपोक्सिया ऑफ कोविड के शिकार बने हैं।

क्यों कहा जाता है हैप्पी हाइपोक्सिया

एक सामान्य व्यक्ति का ऑक्सीजन स्तर 95 से 100 फीसद के बीच होता है। मरीज के शरीर में संक्रमण होने से उसका ऑक्सीजन स्तर गिरता है पर इसका आभास उसे नहीं होता। इसी खुशफहमी की वजह से इसे हैप्पी हाइपोक्सिया कहा जाता है। ऑक्सीजन का स्तर 70 से 80 तक पहुंचने पर भी मरीज को सांस लेने में परेशानी नहीं होती।

कैसे पता चलेगा हैप्पी हाइपोक्सिया है?

  • इसमें शरीर में ऑक्सीजन घटता है।
  • कार्बन डाइऑक्साइड का स्तर बढ़ रहा होता है।
  • ऐसे में फेफड़ों में सूजन आने पर ऑक्सीजन रक्त में नहीं मिल पाती।
  • मस्तिष्क में ऑक्सीजन की कमी से कोशिकाएं क्षतिग्रस्त होने लगती हैं।
  • अंग खराब होने लगते हैं।
  • मरीज चिड़चिड़ा हो जाता है।
  • अपनी धुन में रहने लगता है।
  • ऑक्सीजन का स्तर काफी कम होने पर सांस लेने में परेशानी होती है, तब तक काफी देर हो चुकी होती है।

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