सबसे असरदार कोरोना वैक्सीन तैयार होने का दावा, अमेरिकी कंपनी मॉडर्ना ने कहा- हमारी वैक्सीन 94. 5 प्रतिशत तक प्रभावी

चैतन्य भारत न्यूज

न्यूयॉर्क. कोरोना वायरस के खिलाफ युद्ध की दिशा में सोमवार को एक अच्छी खबर सामने आई। अमेरिकी दवा कंपनी मॉडर्ना ने दावा किया कि उसके द्वारा विकसित वैक्सीन परीक्षण के आखिरी चरण में है और अब तक यह 94.5 फीसदी तक प्रभावी रही है। कंपनी ने बताया कि वैक्सीन का तीस हजार लोगों पर परीक्षण किया गया है। इसकी एक और बड़ी विशेषता है। इसे अल्ट्रा कोल्ड स्टोरेज (अत्यधिक ठंडे तापमान) पर रखने की आवश्यकता नहीं होगी। इसे दो से आठ डिग्री सेल्सियस तापमान वाले सामान्य रेफ्रिजरेटर में एक महीने तक सुरक्षित रखा जा सकेगा। इसे यदि माइनस 20 डिग्री सेल्सियस तापमान वाले खास तरह के रेफ्रिजरेटर में रखकर छह महीने तक सुरक्षित रखा जा सकता है।

अमेरिका के महामारी रोकथाम विभाग के अधिकारी एंटनी एस. फॉसी ने कहा कि इस तरह के परिणाम हमारी उम्मीद से भी बेहतर हैं। हालांकि इस कंपनी से पहले बड़ी दवा निर्माता कंपनी फाइजर ने नौ नवंबर को बताया था कि उसकी वैक्सीन तीसरे चरण में 90 प्रतिशत तक प्रभावी रही है। ये दोनों कंपनिया साल के अंत तक वैक्सीन उत्पादन की तैयारी में है। उधर, सीरम इंस्टीट्यूट के अनुसार वह भारत में अपनी वैक्सीन का उत्पादन शुरू कर चुका है। मॉडर्ना कंपनी के प्रेसिडेंट स्टीफन होग ने कहा कि हमारे पास जल्दी ही एक ऐसी वैक्सीन आने जा रही है, जो कोरोना को रोक सकती है। वैक्सीन के प्रभाव का अंतरिम आकलन 95 संक्रमितों पर परीक्षण के आधार पर किया गया है। इनमें से केवल पांच लोगों में हल्का संक्रमण दिखाई दिया, वह भी वैक्सीन लगाने के 28 दिनों बाद। इस घोषणा के बाद फाइजर के शेयरों के भाव गिर गए। फाइजर ने नौ नवंबर को जब वैक्सीन के 90 फीसद कारगर होने की घोषणा की थी, तब उसके शेयरों में जुलाई के बाद सबसे बड़ा उछाल आया था।

इसी बीच, यह पता चला है कि भारत मॉडर्ना समेत कोरोना वैक्सीन विकसित कर रही दुनिया की अन्य कंपनियों से लगातार बातचीत कर रहा है। परीक्षण की प्रगति पर भारत की नजर है। सूत्रों ने बताया कि सिर्फ मॉडर्ना ही नहीं, बल्कि फाइजर, सीरम इंस्टीट्यूट, भारत बायोटेक, जायडस कैडिला के साथ भी वैक्सीन की प्रगति को लेकर बातचीत चल रही है। सुरक्षा के मुद्दे पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

Related posts