कोरोना मरीजों को अब ‘ब्लैक फंगस’ रोग का खतरा, जानें कितनी घातक है यह बीमारी

चैतन्य भारत न्यूज

मुंबई. कोरोना की दूसरी लहर से पूरा देश बेहाल है। दूसरी लहर में कोविड के मरीज ज्यादा गंभीर हो रहे हैं। कोविड के कुछ मरीजों में हाल में म्यूकोर्माइकोसिस नाम का एक फंगल इनफेक्शन काफी देखने को मिल रहा है। यह बीमारी ‘ब्लैक फंगस’ के नाम से फैल रही है। आम बोलचाल की भाषा में इस रोगकारी फफूंदी को ब्लैक फंगस कहते हैं।

क्या है ब्लैक फंगस?

ये एक फंगल डिजीज है। जो म्यूकॉरमाइटिसीस नाम के फंगाइल से होता है। ये ज्यादातर उन लोगों को होता है जिन्हें पहले से कोई बीमारी हो या वो ऐसी मेडिसिन ले रहे हों जो बॉडी की इम्युनिटी को कम करती हों या शरीर की दूसरी बीमारियों से लड़ने की ताकत कम करती हों। ये शरीर के किसी भी हिस्से में हो सकता है।

ये शरीर में कैसे पहुंचता है और इससे क्या असर पड़ सकता है?

ज्यादातर सांस के जरिए वातावरण में मौजूद फंगस हमारे शरीर में पहुंचते हैं। अगर शरीर में किसी तरह का घाव है या शरीर कहीं जल गया तो वहां से भी ये इंफेक्शन शरीर में फैल सकता है। अगर इसे शुरुआती दौर में ही डिटेक्ट नहीं किया जाता तो आंखों की रोशनी जा सकती है। या फिर शरीर के जिस हिस्से में ये फंगस फैला है शरीर का वो हिस्सा सड़ सकता है।

ब्लैक फंगस कहां पाया जाता है?

ये बहुत गंभीर लेकिन एक रेयर इंफेक्शन है। ये फंगस वातावरण में कहीं भी रह सकता है, खासतौर पर जमीन और सड़ने वाले ऑर्गेनिक मैटर्स में। जैसे पत्तियों, सड़ी लड़कियों और कम्पोस्ट खाद में ब्लैक फंगस पाया जाता है।

इसके लक्षण क्या हैं?

शरीर के किस हिस्से में इंफेक्शन है उस पर इस बीमारी के लक्षण निर्भर करते हैं। चेहरे का एक तरफ से सूज जाना, सिरदर्द होना, नाक बंद होना, उल्टी आना, बुखार आना, चेस्ट पेन होना, साइनस कंजेशन, मुंह के ऊपर हिस्से या नाक में काले घाव होना जो बहुत ही तेजी से गंभीर हो जाते हैं।

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