पद्मश्री निर्मल सिंह की कोरोनावायरस की चपेट में आकर मौत, किसी भी श्मशान घाट पर नहीं होने दिया अंतिम संस्कार

चैतन्य भारत न्यूज

अमृतसर. स्वर्ण मंदिर के पूर्व रागी ज्ञानी निर्मल सिंह की कोरोना वायरस की चपेट में आकर मौत हो गई। बता दें 62 वर्षीय निर्मल सिंह हाल ही में विदेश से लौटे थे। इसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती किया गया था। बुधवार को उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई और गुरुवार को उनका निधन हो गया।

3 मार्च को हुए थे भर्ती

जानकारी के मुताबिक, 30 मार्च को उनको सांस फूलने और चक्कर आने की शिकायत के बाद निर्मल सिंह को अमृतसर के गुरु नानक देव अस्पताल में भर्ती किया गया था। वहां उनकी जांच रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आई। सरकारी मेडिकल कॉलेज की प्रिंसिपल डॉ। सुजाता शर्मा ने बताया कि, ‘उनकी हालत बुधवार शाम को बिगड़नी शुरू हो गई थी और उन्हें वेंटीलेटर पर रखा गया था। गुरुवार तड़के साढ़े चार बजे हृदय गति रुकने से उनका निधन हो गया।’

कई कार्यक्रमों में शामिल हुए

जानकारी के मुताबिक, निर्मल सिंह 10 मार्च को रामपुर भी आए थे। इसके बाद उन्होंने गुरुद्वारा गुरुनानक दरबार में आयोजित कार्यक्रम में भाग भी लिया था। ज्ञानी निर्मल सिंह ने गुरुद्वारे में लगभग दो घंटे तक कीर्तन किया था इसके बाद वे यहां से चले गए थे। वे दिल्ली और दूसरी जगह पर भी धार्मिक आयोजन में शामिल हुए थे। इससे आशंका है कि कुछ और भी लोग उनके संपर्क में आए होंगे। इतना ही नहीं निर्मल सिंह ने 19 मार्च को अपने परिवार के सदस्यों के साथ चंडीगढ़ में घर में कीर्तन का आयोजन भी किया था। इसमें कुछ रिश्तेदार भी शामिल हुए थे। फिलहाल निर्मल सिंह के परिवार के सदस्यों को क्वारंटीन में भेज दिया गया है। साथ ही निर्मल सिंह के आस-पास के घरों को सील कर दिया है।

नहीं होने दिया अंतिम संस्कार

बता दें गुरुवार शाम को अमृतसर के जिला प्रशासन ने उनके अंतिम संस्कार करने के लिए वेरका स्थित श्मशान घाट पर तैयारी शुरू कर दी थी। वेरका में सभी जातियों के अलग-अलग लगभग छह श्मशान घाट हैं। अंतिम संस्कार को रोकने के लिए सभी जातियों के लोगों ने अपने-अपने घाट की सुरक्षा के लिए पहरा बिठा दिया है। लोगों का कहना था कि दाह संस्कार के बाद राख हवा में उड़कर गांव में गिरेगी जिससे संक्रमण बढ़ेगा। अंत में फतेहगढ़ के शुक्रचक गांव में पंचायती जमीन पर उनका अंतिम संस्कार किया गया।

पद्मश्री से हो चुके हैं सम्मानित

बता दें निर्मल सिंह पद्मश्री पुरस्कार से भी सम्मानित हो चुके हैं। साल 2009 में उन्हें यह सम्मान मिला था। इस पुरस्कार से सम्मानित होने वाले निर्मल सिंह स्वर्ण मंदिर के पहले हजूरी रागी थे। बता दें वह स्वर्ण मंदिर के पूर्व हजूरी रागी रह चुके हैं। उन्हें गुरु ग्रंथ साहिब के गुरबानी में सभी 31 रागों का ज्ञान था।

 

 

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