कोरोना वैक्सीन की सिंगल डोज प्रभावी होने का दावा, जानिए क्या कहते हैं विशेषज्ञ

चैतन्य भारत न्यूज

देश में कोरोना महामारी की दूसरी लहर जारी है और तीसरी का खतरा मंडरा रहा है। कोरोना के खिलाफ में जंग में इकलौता हथियार कोविड वैक्सीन की भी किल्लत है। ऐसे में भारत सरकार इस पर भी रिसर्च करने वाली है कि क्या वैक्सीन की एक डोज ही काफी है। कई रिसर्च भी सामने आई है जिसमे यह कहा गया है कि अगर कोरोना हो चुका है, तो पर्याप्त एंटीबॉडीज बनाने के लिए वैक्सीन की एक डोज ही काफी है। हालांकि, इस थ्योरी पर विशेषज्ञों ने सवाल उठाए हैं।

बीएचयू ने भी साइंस जर्नल के रिसर्च को बताया सही

वैज्ञानिक कहते हैं कि ऐसे लोगों में एंटीबॉडी प्राकृतिक रूप से बनती है और अगर कोरोना से रिकवर हुए लोगों को वैक्सीन का एक डोज भी मिल जाए तो इम्यूनिटी लंबे समय तक बनी रहती है। इसके साथ ही बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने भी अपनी स्टडी में पाया है कि कोरोना से ठीक हुए लोगों के लिए वैक्सीन की एक डोज ही पर्याप्त है।

BHU के वैज्ञानिकों ने 20 लोगों पर अध्ययन किया है और इस रिसर्च को पब्लिश करने के लिए भेजा है। संस्थान के वैज्ञानिकों ने अपनी रिपोर्ट को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से साझा किया है और ये सुझाव दिया है कि कोरोना से ठीक हो चुके लोगों को वैक्सीन की एक डोज ही दी जाए। इससे वैक्सीन का संकट दूर होगा।

विशेषज्ञों ने सिंगल डोज पर उठाए सवाल

वैक्सीन की सिंगल पर अब सवाल उठता है कि ऐसे दावों का पूरा सच क्या है? क्या कोरोना से ठीक हुए मरीजों को वैक्सीन की दूसरी डोज की जरूरत ही नहीं है। हमें ये समझना चाहिए कि डोज का निर्धारण किस आधार पर होता है और ये कैसे पता लगेगा कि वैक्सीन का एक डोज ही पर्याप्त है।

वैज्ञानिक प्रोफेसर गिरिधर बाबू ने कहा कि यह बिल्कुल भी अच्छा विचार नहीं है, यह सुझाव देने के लिए कोई डेटा नहीं है कि जनसंख्या स्तर पर मृत्यु दर या गंभीर बीमारी के खिलाफ पर्याप्त सुरक्षा प्रदान करने के लिए एक खुराक ही काफी है, उपलब्ध साक्ष्य बताते हैं कि टीकों की दो खुराक मौतों को रोकने में प्रभावी है। बाबू ने कहा कि कमजोर आबादी के लिए दोनों खुराक की आवश्यकता है, दी गई समय सीमा में यदि हम दो डोज लेने में असमर्थ हैं तो शायद हम एक खुराक को कवर कर सकते हैं, लेकिन दूसरी खुराक को कुछ समय बाद कम से कम 12 सप्ताह की अवधि में दिया जाना चाहिए।

90% लोगों को लगी कोविशील्ड

भारत में कोवैक्सीन, कोविशील्ड और स्पूतनिक वी वैक्सीन लगाईं जा रहीं हैं। इनमें भी सबसे ज्यादा डोज कोविशील्ड की लग रहीं हैं। देश में अब तक लगी कुल वैक्सीन डोज में से 90 फीसदी से ज्यादा टीके कोविशील्ड के लगाए गए हैं। वहीं अब भारत सरकार अगले कुछ महीनों में इस बात पर रिसर्च करेगी कि क्या कोविशील्ड की सिंगल डोज कोरोना से रक्षा के लिए काफी है?

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