#MeToo : पूर्व केंद्रीय मंत्री एमजे अकबर द्वारा दायर मानहानि याचिका खारिज, पत्रकार प्रिया रमानी बरी

चैतन्य भारत न्यूज

पूर्व केंद्रीय मंत्री एमजे अकबर द्वारा पत्रकार प्रिया रमानी के खिलाफ दायर मानहानि केस को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने खारिज करते हुए उन्हें बरी कर दिया है। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि महिला को दशकों के बाद भी अपनी शिकायत रखने का अधिकार है। इसके साथ ही राउज एवेन्यू कोर्ट ने मानहानि केस में प्रिया रमानी को बरी कर दिया है।

कोर्ट ने क्या कहा?

कोर्ट ने कहा, ‘यौन शोषण आत्मसम्मान और आत्मविश्वास को ख़त्म कर देता है, किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा की सुरक्षा किसी के सम्मान की क़ीमत पर नहीं की जा सकती है, महिलाओं के पास दशकों बाद भी अपनी शिकायत रखने का अधिकार है, सामाजिक प्रतिष्ठा वाला व्यक्ति भी यौन शोषण कर सकता है।’

राउज एवेन्यू कोर्ट ने कहा, ‘पीड़ित को कई साल तक यह नहीं पता था कि उसके साथ क्या हो रहा है। महिला को अपने साथ हुए अपराध के बारे में कभी भी और कहीं भी अपने बात रखने का अधिकार है। दशकों के बाद भी महिला अपने के खिलाफ हुए अपराध के खिलाफ आवाज उठा सकती है। महिला को यौन शोषण अपराध के खिलाफ आवाज उठाने पर सजा नहीं दी जा सकती है।’

कोर्ट ने कहा कि, ‘समाज को यह समझना होगा कि महिलाओं पर यौन उत्पीड़न का कैसा असर होता है। इस तरह का उत्पीड़न गरिमा के खिलाफ है और यह आत्मविश्वास छीन लेता है। व्यक्तिगत गरिमा की कीमत पर किसी की छवि को बनाए नहीं रखा जा सकता। जो व्यक्ति सोशल स्टेटस रखता है, वह भी यौन उत्पीड़न कर सकता है। इस बात को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता कि यौन उत्पीड़न के ज्यादातर मामले बंद दरवाजों के पीछे होते हैं।’

कोर्ट ने कहा, ‘संविधान ने अनुच्छेद 21 और समानता का अधिकार दिया है। प्रिया रमानी को अपनी पसंद के प्लेटफॉर्म पर आपबीती बताने का पूरा हक था। रामायण में सीता की मदद के लिए जटायु आगे आए थे। जब लक्ष्मण से भी सीता के बारे में बताने को कहा गया था तो उन्होंने कहा था कि उनकी नजर कभी सीता जी के पैरों से ऊपर ही नहीं गई। भारतीय मूल्यों में महिलाओं के प्रति सम्मान का यह एक उदाहरण है। शर्म की बात है कि महिलाओं के खिलाफ ऐसे देश में अपराध हो रहे हैं, जहां महिलाओं के सम्मान को लेकर महाभारत और रामायण लिखी जा चुकी है।’

ये है मामला

दरअसल, 2018 में जब देश में #MeToo कैम्पेन शुरू हुआ था, तब रमानी ने एमजे अकबर पर यौन उत्पीड़न करने का आरोप लगाया था। प्रिया रमानी ने जिस घटना का हवाला दिया था, वह करीब 20 साल पुरानी थी और तब अकबर भी पत्रकार थे। 20 साल बाद जब रमानी ने उनके नाम का खुलासा किया, तब अकबर मोदी सरकार में विदेश राज्य मंत्री बन चुके थे। रमानी के बाद करीब 20 महिला पत्रकारों ने अकबर पर छेड़खानी के आरोप लगाए थे। यौन उत्पीड़न के आरोपों के चलते 17 अक्टूबर 2018 को अकबर को मंत्री पद छोड़ना पड़ा। अकबर ने इसके बाद रमानी के खिलाफ मानहानि का केस किया था।

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