कोवाक्सिन और कोविशील्ड में क्या है अंतर? कौनसी वैक्सीन ज्यादा फायदेमंद? जानिए दोनों की खासियत और साइड इफेक्ट

चैतन्य भारत न्यूज

देश में अब कोरोना टीकाकरण के तीसरे चरण में 18 साल से ज्यादा उम्र के लोगों को वैक्सीनेट करने की मुहीम शुरू हो चुकी है। जनता को कोवैक्सीन और कोविशील्ड के डोज दिए जा रहे हैं। हालांकि, इन वैक्सीन के कुछ साइड इफेक्ट्स भी है, जिनसे लोग घबराएं हुए हैं। ऐसे में लोग कन्फ्यूज है कि वह कौनसी वैक्सीन लगवाएं। हम आपको कोवैक्सीन और कोविशील्ड दोनों के ही फायदे और नुकसान के बारे में बता रहे है।

कोवैक्सीन के फायदे

शुरुआत में कोवैक्सीन पर काफी उंगलियां उठाई गई थीं। लेकिन अब दुनियाभर के एक्सपर्ट ने इस वैक्सीन की कार्य क्षमता की प्रशंसा की है। व्हाइट हाउस के मेडिकल एडवाइज एंथॉनी फाउची ने खुद एक हालिया प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि कोवैक्सीन B।1।617 वेरिएंट यानी भारत के डबल म्यूटेंट वेरिएंट को बेअसर करने में कारगर है।

कोविशील्ड के फायदे

कोवैक्सीन और कोविशील्ड एक दूसरे से एकदम अलग हैं। ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका द्वारा डेवलप कोविशील्ड के इस वैक्सीन को कई और भी देशों में इस्तेमाल किया जा रहा है। वैज्ञानिकों का दावा है कि ये वैक्सीन कोरोना के खिलाफ एंटीबॉडी जेनरेट करने का काम करती है। हालांकि इन दोनों ही वैक्सीन की खूबियां इन्हें एक दूसरे से अलग बनाती हैं।

कोवैक्सीन का प्रभाव

कोवैक्सीन और कोविशील्ड दोनों ही वैक्सीन का प्रभाव काफी अच्छा बताया गया है। ये दोनों ही WHO के स्टैंडर्ड को मैच करती हैं। कोवैक्सीन ने अपना बड़ा ट्रायल इस साल फरवरी के अंत में पूरा किया था। क्लीनिकल स्टडीज के मुताबिक, भारत बायोटेक की इस वैक्सीन का एफिकेसी रेट 78 प्रतिशत है। स्टडी के मुताबिक, कोवैक्सीन घातक इंफेक्शन और मृत्यु दर के जोखिम को 100 फीसद तक कम कर सकती है।

कोविशील्ड का प्रभाव

वहीं, कोविशील्ड का एफिकेसी रेट 70 प्रतिशत है, जिसे तकरीबन एक महीने बाद दूसरी डोज़ के साथ 90 फीसद तक बढ़ाया जा सकता है। ये न सिर्फ सिम्पटोमैटिक इंफेक्शन में राहत दे सकती है, बल्कि तेजी से रिकवरी भी कर सकती है।

कोविशील्ड के सामान्य साइड इफेक्ट्स

सीरम इंस्टिट्यूट की कोविशील्ड के लिए फैक्ट शीट में कहा गया है कि वैक्सीन लगने के बाद कुछ हल्के लक्षण देखने को मिल सकते हैं जैसे कि इंजेक्शन लगने वाली जगह पर दर्द और सूजन, सिर दर्द, थकान, मांसपेशियों में दर्द, बेचैनी, पायरेक्सिया, बुखार, जोड़ों में दर्द और मितली महसूस होना। फैक्ट शीट के मुताबिक, वैक्सीनेशन के बाद ऐसे लक्षण दिखने पर पैरासिटामोल जैसी आम पेनकिलर दी जा सकती है। फैक्ट शीट में यह भी कहा गया है कि कोविशील्ड वैक्सीन के बाद डिमाइलेटिंग डिसऑर्डर के भी कुछ मामले देखे गए हैं। हालांकि, इनकी संख्या बहुत कम है और वैक्सीन के साथ इनका कोई संबंध नहीं है।

डिमाइलेटिंग डिसऑर्डर

हमारे शरीर की तन्त्रिका कोशिकाएं मायलिन नाम की एक सुरक्षात्मक परत से ढकी होती हैं जो मस्तिष्क को संदेश भेजने में मदद करती है। मायलिन को नुकसान पहुंचाने वाली स्थितियों को डिमाइलेटिंग डिसऑर्डर कहते हैं।फैक्ट शीट में कहा गया है कि थ्रोम्बोसाइटोपेनिया की समस्या वाले लोगों को कोविशिल्ड बहुत सावधानी से दी जानी चाहिए। थ्रोम्बोसाइटोपेनिया में ब्लड प्लेटलेट्स असामान्य रूप से कम हो जाते हैं।

कोवैक्सीन के सामान्य साइड इफेक्ट्स

फैक्ट शीट के मुताबिक, भारत बायोटेक की कोवैक्सीन देने पर इंजेक्शन लगाने वाली जगह पर दर्द-सूजन, सिर दर्द, थकान, बुखार, शरीर दर्द, पेट दर्द, मितली और उल्टी, चक्कर आना, कंपकंपी और सर्दी- खांसी जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। कोवैक्सीन के कोई असामान्य साइड इफेक्ट्स नहीं बताए गए हैं। कोवैक्सीन बनाने वाली कंपनी भारत बायोटेक का कहना है कि वैक्सीन के पहले, दूसरे और 25,800 लोगों पर जारी तीसरे चरण के ट्रायल में कोई गंभीर दुष्प्रभाव सामने नहीं आए हैं।

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