एम्स के डॉक्टर ने कहा- कोरोना की तीसरी लहर इन दो महत्वपूर्ण कारकों पर निर्भर करेगी

चैतन्य भारत न्यूज

भारत में कोरोना वायरस संक्रमण की दूसरी लहर धीरे-धीरे शांत हो रही है। रोजाना कम होते मामलों को देखते हुए केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा ढील दी जा रही है। हालांकि, विशेषज्ञों ने कोरोना की तीसरी लहर की आंशका जताते हुए लॉकडाउन में ढील न देने की चेतावनी दी है।

कोरोना की तीसरी लहर कब आएगी और यह कितनी गंभीर होगी, किन लोगों को इससे विशेष सावधान रहने की जरूरत है, ऐसे ही कई तरह के कई सारे सवाल दिमाग में घूम रहे हैं। इसी बीच रविवार को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (Aiims) दिल्ली में डिपार्टमेंट ऑफ मेडिसन के सहायक प्रोफेसर नीरज निश्चल ने कोरोना की संभावित तीसरी लहर के कारकों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि, ‘कोरोना की संभावित तीसरी लहर मुख्यरूप से दो महत्वपूर्ण कारकों पर निर्भर करेगी- पहला वायरस से संबंधित और दूसरा मानव-संबंधी। वायरस में होने वाला म्यूटेशन और उससे जनित जटिलताएं हमारे हाथ में नहीं हैं लेकिन मानव-संबंधी कारकों को हम अपने प्रयासों से दूर कर सकते हैं।

कोरोना वायरस की तीसरी लहर कब आएगी?

एम्स के निदेशक रणदीप गुलेरिया ने शनिवार को चेतावनी दी कि, यदि कोविड-उपयुक्त व्यवहार का पालन नहीं किया गया और भीड़-भाड़ नहीं रोकी गई, तो अगले छह से आठ सप्ताह में वायरस संक्रमण की अगली लहर देश में दस्तक दे सकती है। भारत अप्रैल और मई में कोविड-19 महामारी की दूसरी लहर से बुरी तरह प्रभावित हुआ था, जिसमें प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोगों की जानें गई थीं और विभिन्न अस्पतालों में ऑक्सीजन की आपूर्ति में कमी के कारण संकट बढ़ गया था। यहां तक कि कोरोना महामारी से निपटने के लिए देश के अधिकांश हिस्सों में पाबंदी और सख्त प्रतिबंध भी लागू किए गए थे।

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