थाईलैंड ने रखा चक्रवाती तूफान का नाम ‘अम्फान’, आप भी जानिए कैसे तय किए जाते हैं तूफानों के नाम

bulbul cyclone

चैतन्य भारत न्यूज

हर बार जब बंगाल की खाड़ी और अरब सागर से कोई तूफान उठता है तो उसके अजीबोगरीब नाम सामने आते हैं। अब अम्फान (Amphan) बंगाल की खाड़ी के ऊपर भीषण चक्रवाती तूफान में तब्दील हो गया है जिससे ओडिशा तथा पश्चिम बंगाल के कई तटीय जिलों में तेज रफ्तार हवाओं के साथ भारी बारिश की संभावना है। चक्रवाती तूफान अम्फान की रफ्तार बेहद खतरनाक होती जा रही है। यह तूफान लाखों लोगों के लिए यह बड़ा संकट बन गया है। ज्यादातर लोगों की ये जिज्ञासा रहती है कि इन तूफानों के नाम आखिरकार तय कैसे किए जाते हैं? आपके मन में भी कभी न कभी ये सवाल तो आया ही होगा। तो हम आपके इस सवाल का जवाब आज देने वाले हैं।

2004 से शुरू हुआ तूफान को नाम देने का सिलसिला

सभी तूफानों को नाम देने का सिलसिला करीब 15 साल पहले यानी साल 2004 में शुरू हुआ था। तूफान का नाम तय करने के लिए आठ देशों की एक समिति बनाई गई थी। इन सभी आठ देशों को क्रमानुसार आठ नाम देने थे। इस बार आए अम्फान तूफान का नाम थाईलैंड ने दिया है। अम्फान तूफान साल 2004 में तैयार की गई तूफान की लिस्ट का आखिरी नाम है।

8 देशों ने 64 नाम दिए

तूफान के नाम देने वाले आठ देशों में बांग्लादेश, भारत, मालदीव, म्यांमार, ओमान, पाकिस्तान, श्रीलंका और थाईलैंड का नाम शामिल हैं। इन सभी देशों ने आठ-आठ तूफान के नाम दिए हैं और इस प्रकार अब तक कुल 64 नाम तय किए गए हैं। अंग्रेजी वर्णमाला के अनुसार सभी देशों को बारी-बारी से नाम देने थे। ऐसे में सबसे पहले बांग्लादेश को मौका मिला। उसने तूफान को ‘ओनिल’ नाम दिया।

भारत और पाकिस्तान ने दिए ये नाम

तूफान के नाम के लिए एक 8×8 की टेबल बनाई गई है। अब इस टेबल की आठवीं पंक्ति पूरी होने वाली है। आंठवे कॉलम का पहला नाम ‘फैनी’ था और आखिरी नाम ‘अम्फान’। भारत ने इस सूची के लिए अग्नि, आकाश, बिजली, जल, लेहर, मेघ, सागर और वायु जैसे नाम दिए थे। वहीं, पाकिस्तान ने ‘निलोफर’, ‘बुलबुल’ और ‘तितली’ जैसे नाम दिए।

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