निजी डाटा चोरी करने वालों की अब खैर नहीं, होगी जेल और 15 करोड़ तक जुर्माना, जानें डाटा चोरी से बचने के उपाय

data theft

चैतन्य भारत न्यूज

नई दिल्ली. निजी डेटा की सेंधमारी ने बीते कुछ सालों में भारत समेत दुनियाभर के कई देशों की सरकारों की टेंशन बढ़ा दी है। इसे लेकर भारत सरकार अब एक डाटा संरक्षण कानून लागू करने की तैयारी में है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इस बिल को मंजूरी दे दी है। अब सरकार संसद में चल रहे शीतकालीन सत्र में इस बिल को पेश करेगी। इस बिल के मुताबिक डाटा लीक होने पर कंपनियों पर जुर्माना लगाने का प्रावधान है।


तीन साल तक होगी जेल

दरअसल, तेज रफ्तार जिंदगी में लगभग हर काम इंटरनेट के जरिए ही होता है। महानगरों की ही बात करें तो राशन से लेकर खाना, दवा, अस्पताल में समय लेना, रेल-बस टिकट और कपड़े तक ऑनलाइन खरीदे जा रहे हैं। ऑनलाइन खरीदारी करने में यूजर को अपनी सभी जानकारी देनी होती है। ऐसे में यूजर का डाटा इंटरनेट कंपनियों के पास पहुंच जाता है और फिर उसका गलत इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन नए बिल के तहत यदि इंटरनेट कंपनियां यूजर के डाटा का गलत इस्तेमाल करती है तो उन पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा। जानकारी के मुताबिक, निजी डाटा चुराने पर अब कंपनी के जिम्मेदार अधिकारियों को तीन साल की जेल भी हो सकती है और कंपनी को 15 करोड़ रुपए तक या उसके वैश्विक टर्नओवर का चार फीसदी जुर्माना भी देना पड़ सकता है।

राष्ट्रीय हित से जुड़े मामलों में डाटा के इस्तेमाल की अनुमति

बिल के मुताबिक, कोई भी निजी या सरकारी संस्था किसी व्यक्ति के डाटा का उसकी अनुमति के बिना इस्तेमाल नहीं कर सकती। किसी भी व्यक्ति को उसके डाटा के संबंध में अहम अधिकार होंगे। चिकित्सा आपातकाल और राज्य या केंद्र की लाभकारी योजनाओं के लिए ऐसा किया जा सकता है। संबंधित व्यक्ति अपने डाटा में सुधार या फिर संस्था के पास मौजूद अपने डाटा तक पहुंच की मांग कर सकता है। बिल में प्रावधान है कि, ‘किसी भी संस्था को संबंधित व्यक्ति के डाटा को इस्तेमाल करने से पहले उसके बारे में बताना होगा। हालांकि, इस बिल में राष्ट्रीय हित से जुड़े मामलों पर डाटा के इस्तेमाल की अनुमति मिलेगी। जानकारी के मुताबिक, राष्ट्रीय सुरक्षा, कानूनी कार्यवाही और पत्रकारिता के उद्देश्यों के लिए इस डाटा का इस्तेमाल किया जा सकेगा।

ये भी हैं प्रावधान

  • स्वास्थ्य, धर्म या राजनीतिक रुझान, बायोमेट्रिक, आनुवांशिक, यौन रुचियों, लैंगिक, वित्तीय आदि से संबंधित डाटा को संवेदनशील डाटा माना गया है।
  • इसका उल्लंघन करने पर 5 करोड़ रुपए तक या कंपनी के वैश्विक टर्नओवर का दो फीसदी जुर्माने का प्रावधान है।
  • सोशल मीडिया कंपनियों को अपने यूजर की पहचान के लिए ऐसा तंत्र विकसित करना होगा, जो स्वेच्छा से अपनी पहचान बताने को तैयार हैं।
  • सिर्फ राष्ट्रीय सुरक्षा और अदालती आदेश से जुड़े मामलों में ही निजी डाटा का इस्तेमाल किया जा सकता है।

15-20 पैसे प्रति व्यक्ति बिक रहा है डाटा

हाल ही में एक रिपोर्ट सामने आई थी कि, लोगों की निजी जानकारियां महज 15 पैसे से लेकर 50 पैसे प्रति व्यक्ति के थोक भाव बिकती हैं। निजी डाटा लीक करने का कारोबार दस हजार करोड़ रुपए से ज्यादा का है। इनमें सबसे ज्यादा विदेशी कंपनियां लगी हुई हैं। अब तक इन मामलों को लेकर कोई कानून नहीं बना था, ऐसे में पुलिस चाहकर भी कुछ नहीं कर पा रही है। आम जनता के पास रोजाना किसी न किसी कॉल सेंटर से फोन आ जाता है। कोई इंश्योरेंस लेने की बात कहता है तो कोई प्लॉट, फ्लैट, क्रेडिट कार्ड, या पर्सनल लोन का ऑफर करता है। ऐसे में कई बार लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

कैसे होता है डाटा चोरी

विशेषज्ञ की माने तो आपका स्मार्ट फोन कुछ ही सेकंड में हैक हो सकता है। ऐसे में आपकी सभी जानकारी लीक हो जाती है। एक अध्ययन के मुताबिक, 70 प्रतिशत से अधिक स्मार्टफोन ऐप्स ऐसी हैं जो आपकी निजी जानकारी थर्ड पार्टी ट्रैकिंग कंपनियों को दे रही हैं। इन ऐप के जरिए कंपनियों की पहुंच आपके मोबाइल फोन के माइक और फोटो गैलरी तक भी हो जाती है। ये सिलसिला तब से शुरू हुआ है, जब से यूजर्स ने स्मार्टफोन में ऐप डाउनलोड करना शुरू किया है। थर्ड पार्टी के पास डेटा जाने के बाद इसका कई तरह से इस्तेमाल किया जा सकता है। जैसे- गूगल पर जो चीज आप सबसे ज्यादा सर्च करते हैं या पढ़ते हैं उससे संबंधित विज्ञापन आपके मोबाइल और डेस्कटॉप पर आने लगते हैं।

इससे कैसे बचें

  • अपने फोन की ऐप में गैरजरूरी एक्सेस डिसेबल करें।
  • फोन सेटिंग में जाकर आप ऐप परमीशन का स्टेटस देखें, और जिनकी एक्सेस नहीं देनी है, उन्हें डिसेबल कर दें।
  • हमेशा दो मेल आईडी रखे। एक आईडी जो बैंक कम्यूनिकेशन वाली हो उसे मोबाइल से कनेक्ट न करें।
  • सबसे ज्यादा डाटा चोरी उन जगहों से होती है जहां डाउनलोड किया गया।
  • जब भी आप किसी साइबर कैफे कोई जरुरी काम करें, जैसे आधार या फिर अन्य दस्तावेज डाउनलोड करना, तो उन्हें रिसाइकिल बिन से भी डिलीट कर दें।
  • अगर किसी साइबर कैफे में अपना मेल आईडी लॉगिन करते हैं तो उसे डिलीट करके ही जाएं।
  • गूगल प्ले स्टोर पर ऐप डाउनलोड करने से पहले उसकी रेटिंग जरूर देखें। रेटिंग 4 या अधिक होनी चाहिए।

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