समय में सुखद बदलावः बढ़ रही सिर्फ बेटी की इच्छा, पंजाब- हरियाणा में भी दिखा असर

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चैतन्य भारत न्यूज 

नई दिल्ली.  कई मामलों में दकियानूसी सोच वाला भारतीय समाज बदल रहा है। कभी सिर्फ बेटों को कुलदीपक मानकर उन्हीं की चाहत रखने वाले लोगों की सोच में परिवर्तन आया है। बीते दिन दशक में सिर्फ बेटी की ख्वाहिश दोगुनी हुई है। अब नए परिवारों में हर कीमत पर बेटे की पैदाइश पर न जोर है, न खास इच्छा है। कभी बेटे की चाहत के लिए कुख्यात रहे हरियाणा में दो बेटियों वाले परिवार 41 प्रतिशत और पंजाब में 37 प्रतिशत बढ़े हैं। यह ट्रेंड सकारात्मक बदलाव का प्रतीक है।
ये तथ्य इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ पॉपुलेशन साइंसेज के शोध के बाद सामने आए हैं। इस शोध की अगुवाई मुंबई के जनसंख्या विज्ञान संस्थान के प्रो. हरिहर साहू ने की है। उन्होंने दैनिक भास्कर को बताया कि वर्ष 1992 से लेकर 2016 तक के नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे में शामिल आठ लाख 88 हजार परिवार की नौ लाख 99 हजार विवाहित महिलाओं से बातचीत के आधार पर यह सर्वे किया गया है। परिवारों को ग्रामीण और शहरी के अलावा शिक्षा के स्तर, धार्मिक और जातीय आधार के चार वर्गों में बांटा गया था। शिक्षा के स्तर को भी निरक्षर, प्राथमिक, हायर सेकंडरी और उच्च शिक्षा जैसी श्रेणियों में बांटा गया था।

ये निकले परिणाम

  • दो बेटियों और बिना बेटे वाले 33.6 फीसदी घरों में परिवार नियोजन अपना लिया गया यानी दो बेटियों के बाद बेटे या अन्य संतान की कोई इच्छा नहीं दिखाई गई। यह फैसला करने वाले परिवार भी उच्च शिक्षित और संपन्न परिवार हैं।
  •  यह भी सामने आया कि नसबंदी करवाने वाले 60 प्रतिशत दंपत्ति ऐसे थे जिनके परिवार में दो बेटे हैं और बेटी एक भी नहीं है।
  • ग्रामीण दंपतियों में सिर्फ बेटी तक ही परिवार को सीमित रखने की चाहत 25 प्रतिशत कम पाई गई।
  • महाराष्ट्र में एक बेटी वाले परिवार 26 प्रतिशत, दो बेटी वाले परिवार 63.4 फीसदी और तीन बेटी वाले परिवार 71.5 प्रतिशत हैं।
  • पारंपरिक आधार पर बेटों की ज्यादा चाहत वाले क्षेत्रों पंजाब और हरियाणा में बड़ा बदलाव नजर आया।
  • पंजाब में पिछले एक दशक में एक बेटी वाले परिवार 21 प्रतिशत, दो बेटियों वाले परिवार 37 फीसदी व तीन बेटियों वाले परिवार 45 प्रतिशत बढ़े हैं।
  • हरियाणा में एक दशक में एक बेटी वाले परिवार 27 प्रतिशत, दो बेटियों वाले परिवार 41 प्रतिशत और तीन बेटियों वाले परिवार 40.4 प्रतिशत बढ़े हैं।
  • यही नहीं इन दोनों राज्यों में कई परिवारों ने बेटी के बाद परिवार वृद्धि न करने का फैसला लेकर इस सिर्फ बेटी की इच्छा वाली सोच को जबरदस्त रूप से नकारा है।

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