1993 से अबतक दिल्ली में कुल 6 बार हुए चुनाव, देखें कब किसके सिर सजा मुख्यमंत्री का ताज

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चैतन्य भारत न्यूज

नई दिल्ली. सोमवार को दिल्ली विधानसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है। दिल्ली विधानसभा चुनाव 2020 के लिए मतदान 8 फरवरी को होंगे और 11 फरवरी को चुनाव के नतीजे आ जाएंगे। इस बार चुनावों में त्रिकोणीय मुकाबले होना तय माना जा रहा है। आम आदमी पार्टी, भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस समेत अन्य पार्टियों ने तैयारी शुरू कर दी है। बता दें दिल्ली में 1993 से लेकर अब तक कुल छह विधानसभा चुनाव हुए हैं। इनमें से एक बार बीजेपी, तीन बार कांग्रेस और दो बार आम आदमी पार्टी सत्ता पर विराजमान होने में कामयाब रही है। आइए एक नजर डालते हैं दिल्ली विधानसभा चुनाव के इतिहास पर-


1993 में विधानसभा चुनाव, बीजेपी के सिर ताज

पहली बार राजधानी दिल्ली में विधानसभा चुनाव 1993 में हुआ था। इससे पहले दिल्ली चंडीगढ़ की तरह केंद्र शासित प्रदेश हुआ करता था और यहां विधानसभा नहीं थी। दिल्ली में पहले चुनाव में ही बीजेपी कमल खिलाने में कामयाब रही थी। दिल्ली की कुल 70 विधानसभा सीटों में बीजेपी ने 47.82 फीसदी वोट के साथ 49 सीटें जीती थी और सेहरा मदनलाल खुराना के सिर मुख्यमंत्री पद का ताज सजा था। उस दौरान कांग्रेस को 34.48 फीसदी वोट के साथ 14 सीटें मिली थीं।

1998 में विधानसभा चुनाव, शीला दीक्षित को सत्ता की कमान

दिल्ली में दूसरी बार 1998 में विधानसभा चुनाव हुआ था। बीजेपी से सुषमा स्वराज तो कांग्रेस से शीला दीक्षित मैदान में थीं। इस जंग में शीला दीक्षित बीजेपी की सुषमा स्वराज पर भारी पड़ीं। चुनाव में कांग्रेस 47.76 फीसदी वोट के साथ 52 सीटें जीतने में कामयाब रहीं। वहीं, बीजेपी को महज 34.02 फीसदी वोट के साथ 15 सीटें मिलीं।

2003 में विधानसभा चुनाव, कांग्रेस की सत्ता में वापसी

साल 2003 में दिल्ली में तीसरी बार विधानसभा चुनाव हुए। इस बार बीजेपी ने शीला दीक्षित के खिलाफ मदनलाल खुराना को मैदान में उतारा था। लेकिन उस चुनाव में भी मुख्यमंत्री पद का ताज शीला दीक्षित के सिर ही सजा। उस चुनाव में कांग्रेस 48.13 फीसदी वोट के साथ 47 सीटें जीतने में कामयाब रही और बीजेपी 35.22 फीसदी वोट के साथ 20 सीटें ही जीत सकी।

2008 में विधानसभा चुनाव, शीला ने लगाई हैट्रिक

दिल्ली में साल 2008 में चौथी बार विधानसभा चुनाव हुए। लेकिन इस बार भी शीला दीक्षित सब पर भारी पड़ीं। बीजेपी ने विधानसभा चुनाव 2008 में शीला दीक्षित के खिलाफ विजय कुमार मल्होत्रा को खड़ा किया था। लेकिन वो भी कामयाब नहीं रहे। 2008 में विधानसभा चुनाव में दिल्ली की कुल 70 विधानसभा सीटों में से कांग्रेस 40.31 फीसदी वोट के साथ 43 सीटें जीतने में कामयाब रही थी। उस चुनाव में बीजेपी को 36.34 फीसदी वोटों के साथ 23 सीटें से संतोष करना पड़ा और तीन सीटें अन्य को मिलीं।

2013 में विधानसभा चुनाव, किसी को नहीं बहुमत

राजधानी में पांचवी बार विधानसभा चुनाव साल 2013 में हुए। इस चुनाव में बीजेपी और कांग्रेस के अलावा तीसरे राजनीतिक दल के तौर पर आम आदमी पार्टी सामने आई थी। अरविंद केजरीवाल ने कांग्रेस के सियासी समीकरण को बिगाड़कर रख दिया था। विधानसभा चुनाव 2013 में दिल्ली की कुल 70 विधानसभा सीटों में से बीजेपी 33 फीसदी वोटों के साथ 31 सीटें जीतने में कामयाब रही। आम आदमी पार्टी ने 29.5 फीसदी वोट के साथ 28 सीटें जीती और कांग्रेस को 24.6 फीसदी वोटों से साथ महज 8 सीटें ही मिलीं। आम आदमी पार्टी को कांग्रेस ने बाहर से समर्थन दिया और फिर अरविंद केजरीवाल मुख्यमंत्री बनने में कामयाब रहे। हालांकि, उस समय केजरीवाल 49 दिन तक सीएम रहे और फिर 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले उन्होंने सीएम पद से इस्तीफा दे दिया।

2015 विधानसभा चुनाव, AAP को प्रचंड जीत

छठी बार दिल्ली में साल 2015 में विधानसभा चुनाव हुए। इस चुनाव में भी केजरीवाल ने बीजेपी और कांग्रेस दोनों को पछाड़ दिया। दिल्ली की 70 विधानसभा सीटों में केजरीवाल की पार्टी को 67 सीटें मिलीं। जबकि बीजेपी को महज तीन सीटें ही मिल सकी। वहीं, कांग्रेस की बात करें तो वह तो दिल्ली में अपना खाता भी नहीं खोल सकी।

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