दिल्ली हाईकोर्ट का निर्देश : FIR में गैर प्रचलित उर्दू और फारसी शब्दों का प्रयोग ना करें, सिर्फ आम शब्द इस्तेमाल करें

fir

चैतन्य भारत न्यूज

नई दिल्ली. आजादी के इतने साल बाद भी पुलिस, कोर्ट और राजस्व के कामकाज में उर्दू-फारसी के शब्दों का इस्तेमाल किया जा रहा है। कई बार तो ऐसे-ऐसे शब्दों का प्रयोग होता है जिनको समझना आम आदमी के लिए बेहद मुश्किल हो जाता है। ऐसे में बुधवार को दिल्ली हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट किया है कि, ‘पुलिस एफआईआर दर्ज करते समय सरल भाषा का इस्तेमाल करें। उर्दू, फारसी के उन शब्दों का प्रयोग न करें जो आम बोलचाल की भाषा में न हों।’



कोर्ट ने कहा कि, ‘उसने अपने पहले के आदेश में सिर्फ यही निर्देश दिया था कि एफआईआर में सरल भाषा का इस्तेमाल होना चाहिए और गैर प्रचलित उर्दू-फारसी शब्दों से बचना चाहिए।’ मुख्य न्यायाधीश डी एन पटेल और न्यायमूर्ति सी हरि शंकर की पीठ ने कहा कि, ‘शिकायत दर्ज करते समय पुलिस आम बोलचाल में इस्तेमाल होने वाले उर्दू और फारसी के शब्दों का उपयोग कर सकती है।’ कोर्ट ने यह बात एक याचिका का निपटारा करते समय कही।

दरअसल याचिका में पुलिस थानों को भेजे गए पुलिस के एक परिपत्र को चुनौती दी गई थी जिसमें एफआईआर दर्ज करते समय उर्दू या फारसी के 383 शब्दों का इस्तेमाल बंद करने का निर्देश दिया गया था। यह याचिका नईमा पाशा की ओर से दायर की गई थी। उनका दावा था कि, दिल्ली पुलिस का सर्कुलर (परिपत्र) कथित रूप से कोर्ट के सात अगस्त के उस निर्देश के बाद जारी किया गया, जिसमें उसने शिकायत दर्ज करते समय सरल शब्दों के इस्तेमाल का निर्देश दिया गया था। लेकिन थानों में इस आदेश का पालन नहीं किया जा रहा।

पीठ ने याचिका का निपटारा करते हुए कहा कि वह अपने सात अगस्त के आदेश पर स्पष्टीकरण देगा। बता दें 25 नवंबर को एक वकील की अन्य याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने यह पता लगाने के लिए कि क्या 20 नवंबर के परिपत्र का पालन हो रहा है, उसने प्राथमिकी की 100 प्रतियां मंगाई थीं।

ये भी पढ़े…

हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस से किया सवाल- एफआईआर में उर्दू और फारसी के शब्दों का इस्तेमाल क्यों?

दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा- शादी का वादा करके शारीरिक संबंध बनाना दुष्कर्म नहीं, बरी हुआ आरोपित

पत्नी द्वारा खाना बनाकर न देना, पति से सहानुभूति न रखना, यह सिर्फ वैवाहिक नाेकझाेंक है तलाक का आधार नहीं : दिल्ली हाईकोर्ट

 

Related posts