देवउठनी एकादशी : बेहद फलदायी होता है देवउठनी एकादशी का व्रत, जानिए इसके जरूरी नियम

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चैतन्य भारत न्यूज

कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवउठनी एकादशी का त्योहार मनाया जाएगा। इस बार देवउठनी एकादशी 25 नवंबर को पड़ रही है। शास्त्रों के मुताबिक, भगवान विष्णु आषाढ़ शुक्ल एकादशी को चार महीने के लिए सो जाते हैं और एक ही बार कार्तिक शुक्ल एकादशी को जागते हैं। देवउठनी एकादशी को हरिप्रबोधिनी एकादशी और देवोत्थान एकादशी के नाम से भी जाता हैं।



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देवउठनी एकादशी व्रत के नियम

  • निर्जला या सिर्फ ज्यूस और फल पर ही उपवास रखना चाहिए।
  • अगर रोगी, वृद्ध, बालक या व्यस्त व्यक्ति हैं तो वह कुछ घंटों का उपवास रखकर अपना व्रत खोल सकता है।
  • इस दिन भगवान विष्णु की उपासना करते हैं।
  • पूजा के दौरान “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः” मंत्र का लगातार जाप करना चाहिए।
  • इसके बाद व्रत-उपवास की कथा सुनी जाती है।
  • इसके बाद से सारे मंगल कार्य विधिवत शुरु किए जा सकते हैं।

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