जानिए कब है देवशयनी एकादशी, इसका महत्व और पूजा विधि

devshayani ekadashi 2019

चैतन्य भारत न्यूज

हिन्दू धर्म में देवशयनी एकादशी को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस साल देवशयनी एकादशी 20 जुलाई को पड़ रही है। आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को ही देवशयनी एकादशी कहा जाता है। इस दौरान भगवान विष्णु क्षीरसागर में विश्राम के लिए चले जाते हैं। इसके बाद देवोत्थानी एकादशी को उन्हें उठाया जाता है। इस बीच के अंतराल को ही चातुर्मास कहा गया है। इस दौरान किसी प्रकार के शुभ कार्य भी नहीं किए जाते हैं। आइए जानते हैं देवशयनी एकादशी का महत्व और पूजा-विधि।

देवशयनी एकादशी का महत्व 

देवशयनी एकादशी को कई नामों से जाना जाता है। जैसे कि आषाढ़ी एकादशी, पदमा एकादशी और हरी शयनी एकादशी। इसके अलावा भारत में कई जगह इस तिथि को ‘पद्मनाभा’ भी कहते हैं। मान्यता है कि, सूर्य के मिथुन राशि में आने पर ये एकादशी आती है। इस दिन व्रत रखने और पूजा करने का खास महत्व होता है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। देवशयनी एकादशी के दिन पूजा-पाठ वाले स्थान पर भगवान विष्णु की सोने, चांदी, तांबे या पीपल की मूर्ति की स्थापना की जाती है। इसके बाद पूरे विधि-विधान के साथ विष्णु की पूजा की जाती है।

देवशयनी एकादशी की पूजा-विधि

  • देवशयनी एकादशी के दिन सबसे पहले जल्दी उठकर घर की साफ-सफाई करें।
  • स्नान कर घर में पवित्र जल का छिड़काव करें।
  • देवशयनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु का कमल के पुष्पों से पूजन करना बहुत शुभ माना जाता है।
  • ऐसा कहा जाता है कि, इन चार महीनों के दौरान भगवान शिवजी सृष्टि को चलाते हैं। इसलिए विष्णु के साथ भगवान शिव की पूजा करना शुभ माना गया है।
  • इस दिन व्रत रखकर भगवान विष्णु की कथा सुनें।
  • देवशयनी एकादशी की पूजा के बाद गरीबों को फल दान करें।

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