धनु संक्रांति 2019 : आज से एक महीने के लिए बंद हो जाती हैं शादियां, जानिए इस संक्रांति का महत्व और पूजन-विधि

dhanu sankranti 2019, dhanu sankranti 2019 ka mahatav, dhanu sankranti 2019 pujan vidhi

चैतन्य भारत न्यूज

ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक सूर्य का किसी राशि में प्रवेश संक्रांति कहलाता है और जब सूर्य धनु राशि में प्रवेश करते हैं तो इसे धनु संक्रांति कहा जाता है। पौष मास की संक्रांति को धनु संक्रांति कहते हैं, जो कि इस बार 16 दिसंबर को है। आइए जानते हैं धनु संक्रांति का महत्व और पूजन-विधि।



dhanu sankranti 2019, dhanu sankranti 2019 ka mahatav, dhanu sankranti 2019 pujan vidhi

धनु संक्रांति का महत्व

धनु संक्रांति के दिन सूर्यदेव की पूजा करना बहुत शुभ माना जाता है। इस दिन पवित्र नदियों के जल में स्नान करने से मनुष्यों के द्वारा किए गए बुरे कर्म या पापों से मुक्ति मिलती है। शास्त्रों के मुताबिक, धनु संक्राति के बाद से कोई मांगलिक कार्य नही किया जाता है। जैसे शादी, सगाई, वधु प्रवेश, गृह प्रवेश, गृह निर्माण, नए व्यापार का आरंभ आदि।

dhanu sankranti 2019, dhanu sankranti 2019 ka mahatav, dhanu sankranti 2019 pujan vidhi

दरअसल किसी भी विवाह का सबसे बड़ा उद्देश्य सुख और समृद्धि की प्राप्ति होती है और धनु राशि को संपन्नता की राशि मानी जाती है। इस समय सूर्य धनु राशि में गमन करता है जिसे सुख समृद्धि के लिए अच्छा नहीं माना जाता है। इस महीने की शुरुआत से ही सभी शादियां एक महीने के लिए बंद हो जाएंगी। इसके बाद 15 जनवरी यानी मकर संक्रांति 2020 के बाद से ही सारे शुभ कार्य फिर से शुरू होंगे।

धनु संक्रांति की पूजन-विधि

  • इस दिन सूर्योदय से पहले उठ स्नान कर सूर्यदेव की पूजा करनी चाहिए।
  • पानी में लाल चंदन मिलाकर तांबे के लोटे से सूर्य को जल चढ़ाएं। साथ ही रोली, हल्दी व सिंदूर मिश्रित जल से सूर्यदेव को अर्घ्य दें।
  • इसके बाद सूर्य देव को लाल फूल चढ़ाएं।
  • सूर्यदेव को गुड़ से बने हलवे का भोग लगाएं।
  • इसके बाद लाल चंदन की माला से ‘ॐ भास्कराय नमः’ मंत्र का जाप करें।
  • पूजन के बाद नैवेद्य लगाएं और उसे प्रसाद के रूप में बांट दें।

ये भी पढ़े…

ये है भगवान गणेश का अनोखा मंदिर, जहां चोर करते थे चोरी के माल का बंटवारा, बप्पा को भी देते थे हिस्सा

सोमवार के दिन इस विधि से पूजा करने पर बन जाएंगे बिगड़े काम

शनिवार के दिन इस तरह पूजन से प्रसन्‍न होंगे शनिदेव, जानिए व्रत का महत्व और पूजा-विधि

Related posts