छतरपुर हीरा खदान नीलामी : अडानी को पछाड़ बिड़ला ग्रुप ने मारी बाजी, 80 हजार करोड़ तक पहुंची थी बोली

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चैतन्य भारत न्यूज

पन्ना. मध्यप्रदेश के छतरपुर में स्थित देश की सबसे बड़ी हीरा खदान को पाने के लिए बिड़ला और अडानी समूह अड़े हुए थे। 55 हजार करोड़ रुपए से अधिक कीमत की बक्सवाह की इस बंदर हीरा खदान के लिए ऑनलाइन नीलामी मंगलवार सुबह 11 बजे से शुरू हुई थी। नीलामी के दौरान इस खदान के लिए बोली शुरू होने के 24 घंटे के अंदर ही 80 हजार करोड़ रुपए तक पहुंच गई। आख़िरकार यह हीरा खदान बिड़ला ग्रुप को मिली है।


बुधवार को खनिज मंत्री प्रदीप जयसवाल ने बताया कि, ‘छतरपुर के बक्सवाह स्थित बंदर हीरा खदान बिड़ला ग्रुप को मिली है। यह खदान बिड़ला ग्रुप को 50 साल की लीज पर दी गई है। इस खदान से मध्य प्रदेश सरकार को करीब 23 हजार करोड़ रुपए (30.5 फीसदी हिस्सेदारी और 11.50 फीसदी रॉयल्टी) का राजस्व मिलेगा। उन्होंने यह भी बताया कि, कंपनी को दो साल के अंदर काम शुरू करना होगा।

जानकारी के मुताबिक, खदान की नीलामी प्रक्रिया में देश की नामी कंपनियां अडानी, रूंगटा व बिड़ला ग्रुप शामिल हुईं थी। बता दें इस खदान में 3.50 करोड़ कैरेट हीरे के भंडार का अनुमान है, जिसकी कीमत 55 हजार करोड़ आंकी गई है। इस खदान के लिए पांच कंपनियों ने 13 नवंबर को खुली प्रथम चरण की निविदा में बोली जमा कर अपना दावा प्रस्तुत किया था। लेकिन, मंगलवार शाम तक जारी नीलामी में अडानी और बिड़ला समूह ही बचे थे।

गौरतलब है कि साल 2007 में सरकार ने हीरा कंपनी रियोटिंटो को खदान का सर्वे सौंपा था। उस समय यह शर्त रखी गई थी कि कंपनी खदान से निकलने वाला हीरा निर्यात नहीं कर सकेगी और हीरे की कटिंग और पॉलिशिंग मध्य प्रदेश में ही करना होगी। जब कंपनी को इसमें मुनाफा नहीं दिखा तो उसने यह प्रोजेक्ट छोड़ दिया। इसके बाद से ही यह हीरा खदान बंद थी। सरकार इस शर्त को फिर से रखने के बारे में सोच रही थी लेकिन जब अन्य कंपनियों की अरुचि दिखी तो उन्होंने यह शर्त हटा दी।

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