पछतावा होने से पहले आप भी जान लीजिए प्यार और आकर्षण में अंतर

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चैतन्य भारत न्यूज

रिलेशनशिप में रहने के बावजूद कई बार लोग यह नहीं समझ पाते हैं कि यह प्यार है या फिर सिर्फ आकर्षण। कई बार रिश्तों में रहकर एक व्यक्ति तो शादी तक के सपने देख लेता है और वहीं दूसरा इस बात को लेकर ही कन्फ्यूज रहता है कि वह सच में प्यार में है भी या नहीं। अगर आपके साथ भी ऐसी ही स्थिति है तो हम आपको आज प्यार और आकर्षण में अंतर बता रहे हैं।


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प्यार और आकर्षण में इतना ही अंतर होता है कि आकर्षण कितनी भी बार हो सकता है। यह दिनभर में दो-चार बार किसी भी व्यक्ति से हो सकता है लेकिन प्यार बार-बार नहीं होता। आकर्षण में सामने वाले व्यक्ति को देखते ही आप दो पल में उसे पसंद करने लगते हैं। लेकिन ये ज्यादा समय तक के लिए नहीं रहता है। यदि वो व्यक्ति आपके सामने से चला जाए तो शायद कुछ देर बाद आप उसे भूल जाएंगे या उस पर ज्यादा ध्यान नहीं देंगे। लेकिन अगर आप उससे सच में प्यार कर बैठते हैं तो फिर आप उसे पाने की कोशिश करेंगे और दिनभर आपके दिमाग में उसी का ख्याल आएगा।

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वैसे प्यार की शुरुआत भी आकर्षण से ही होती है लेकिन प्यार में आप धीरे-धीरे सामने वाले को और भी ज्यादा पसंद करने लगते हैं। प्यार में आपको कई तरह के समझौते भी करने पड़ते हैं और कई बदलाव भी। इसी से यह पता चलता है कि आप सच में किसी से प्यार करने लगे हैं। आकर्षण में न तो खुद को ज्यादा बदला जाता है और न हो कोई समझौता करना पड़ता है। आकर्षण में व्यक्ति सिर्फ मतलब की बातें करता है। आकर्षण में सामने वाले के साथ घूमना और खाना-पीना ही पसंद आता है लेकिन प्यार में पार्टनर के साथ क्वालिटी टाइम स्पेंड करना अच्छा लगता है। प्यार में व्यक्ति पार्टनर के साथ एक-एक पल बिताने की तलाश में रहता है।

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