सैनिटाइजर के भरोसे रहकर आप कर रहे हैं अपनी सेहत के साथ खिलवाड़!

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टीम चैतन्य भारत

पानी ना उपलब्ध होने पर ज्यादातर लोग हाथ धोने के लिए सैनिटाइजर को बेहतर विकल्प मानते हैं। ऐसा मानना है कि सैनिटाइजर से कीटाणु पूरी तरह खत्म हो जाते हैं। लेकिन यह सच नहीं है। सैनिटाइजर काफी हद तक माइक्रोब्स हटा देता है, लेकिन ये बीमार करने वाले कीटाणु जैसे क्रिप्टोस्पोरिडियम, नोरोवायरस और क्लोस्ट्रिडियम को पूरी तरह से नहीं हटा पाता है। इन कीटाणुओं को पूरी तरह से नष्ट करने के लिए साबुन और पानी ही असरदार होता है।

वाशिंगटन की यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड ने एक रिसर्च की जिसमें ये पता लगाया कि एंटी बैक्टिरीअल साबुन, लिक्विड साबुन और सैनिटाइजर में से कौन सबसे ज्यादा असरकारक है। 20 सेकंड तक एंटी बैक्टिरीअल साबुन से हाथ धोने वाले लोगों के हाथों में कीटाणु नहीं मिले। सैनिटाइजर (जिसमें 60% अल्कोहल था) से हाथ धोने वाले लोगों के हाथों में काफी हद तक कीटाणु नष्ट हो गए थे। लेकिन 10 सेकंड तक हाथ धोने वाले लोगों के हाथों में 50% कीटाणु बचे थे। इस रिसर्च में कीटाणुओं को पूरी तरह से खत्म करने के लिए एंटी बैक्टिरीअल साबुन को सैनिटाइजर और लिक्विड साबुन की तुलना में बेहतर पाया गया।

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यदि सैनिटाइजर में 60% अल्कोहल हो तभी वह कीटाणुओं को मारेगा। लेकिन सैनिटाइजर में एक कमी यह पाई गई है कि, यह हाथों में लगाते ही कुछ ही सेकंड में उड़ जाता है जिससे कि हाथों की महीन रेखाओं में कीटाणु छिपे रह जाते हैं, जो सैनिटाइजर के इस्तेमाल से पूरी तरह नहीं मर पाते हैं। साथ ही सैनिटाइजर हाथों में जमी हुई गंदगी और चिकनाई भी नहीं हटा पाता है। इसलिए हमेशा साबुन से ही हाथ धोना चाहिए। कुछ परिस्थितियों में जब आपके पास साबुन उपलब्ध ना हो तो उस समय आप 60% अल्कोहल बेस्ड सैनिटाइजर का इस्तेमाल कर सकते हैं।

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