पांच दिवसीय दीपोत्सव पर्व आज से शुरू, जानिए हर दिन की मान्यता

चैतन्य भारत न्यूज

आज धनतेरस के साथ 5 दिन का दीप पर्व शुरू हो रहा है, जो कि भाईदूज पर संपन्न होगा। इन पांच दिनों के पर्व में हर दिन श्रद्धा अनुसार मंदिरों, घरों, ऑफिस सहित नदी, झीलों और तालाबों के किनारे कई जगहों पर दीपक लगाए जाते हैं। ये पांच दिनों के दीप पर्व धरती के सबसे पुराने त्योहार हैं। इन दिनों में दीपक जलाने की परंपरा सदियों पुरानी है। ये करीब ढाई हजार से 5 हजार साल पुरानी संस्कृति है जो धीरे-धीरे परंपराओं में बदली और फिर इसने उत्सव का रूप ले लिया। आइए जानते हैं इन 5 दिन में आने वाले पांच तरयोहारों के बारे में-

धनतेरस

धनतेरस पर सोना-चांदी, गहना-बर्तन आदि क्रय कर लक्ष्मी-गणेश, कुबेर का पूजन किया जाता है। ख्यात ज्योतिषाचार्य पं. ऋषि द्विवेदी के अनुसार 12 नवंबर को गणेश-लक्ष्मी पूजन का उत्तम शुभ मुहूर्त शाम 6.31 से 7.30 बजे तक है। उसके बाद रात 10.30 बजे तक भी पूजन अच्छा रहेगा। खरीदारी का शुभ मुहूर्त शाम 6.31 के बाद मिल रहा है।

नरक चौदस

नरक चौदस चंद्रोदय व्यापिनी कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी में मनाते हैैं। चतुर्दशी 13 नवंबर को शाम 4.12 बजे लग रही है जो 14 को दिन में 1.49 बजे तक रहेगी। काशी ङ्क्षहदू विश्वविद्यालय के ज्योतिष विभागाध्यक्ष डा. विनय पांडेय के अनुसार चौदस में चंद्रोदय व्यापिनी तिथि मानी जाती है। अत: नरक चौदस का यम के नाम चार बत्तियों का दीपदान 13 को किया जाएगा।

दीपावली

दीप ज्योति पर्व श्रृंखला का मुख्य उत्सव दीपावली 14 नवंबर को मनाई जाएगी। काॢतक अमावस्या 14 नवंबर को दिन में 1.49 बजे लग रही जो 15 नवंबर को दिन में 11.27 बजे तक रहेगी। पहले दिन प्रदोष व रात्रिकालीन अमावस्या में दीपावली, दूसरे दिन उदया तिथि में स्नान -दान की अमावस्या होगी। दीपावली पर लक्ष्मी पूजन के लिए प्रथम स्थिर लग्न कुंभ दिन में 12.57 से 2.28 बजे तक है। दूसरा व प्रमुख स्थिर लग्न वृषभ शाम 5.33 से शाम 7.29 बजे तक है। ज्योतिषाचार्य पं. ऋषि द्विवेदी के अनुसार अबकी महालक्ष्मी पूजन के समय दशकों बाद सिद्धयोग के साथ स्वाति नक्षत्र भी मिल रहा है।

काली पूजा : कार्तिक अमावस्या की रात बंगीय समाज में काली पूजा या श्यामा पूजा का विधान है। निशीथ काल में इसके पूजन विधान निभाए जाते हैैं। यह अवधि रात 12 से तीन बजे तक की होती है। इस दौरान तांत्रिक गण तंत्र पूजा आदि भी करते हैैं। इस बार काली पूजा 14 नवंबर को की जाएगी।

अन्नकूट

अन्नकूट यथार्थ में गोवर्धन पूजा का ही समारोह है। इसे दीपावली के दूसरे दिन कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को मनाया जाता है। अत: यह पर्व 15 नवंबर को मनाया जाएगा। तिथि विशेष पर देवालयों में प्रभु को कूट-कूट कर बनाए गए 56 प्रकार के पकवानों का भोग अर्पित किया जाता है।

गोवर्धन पूजा

दीपावली के दूसरे दिन कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा तिथि में 15 नवंबर को काशी के अलावा पूरे देश में गोवर्धन पूजा की जाएगी। तिथि विशेष पर गाय के गोबर से गोवर्धन बनाकर पूजन किया जाता है। काशी में गोवर्धन पूजा 16 नवंबर को होगी।

भाई दूज

कार्तिक शुक्ल द्वितीया को यम द्वितीया भइया दूज के रूप में मनाई जाती है। यह पर्व इस बार 16 नवंबर को मनाया जाएगा। प्रात: स्नानादि कर अक्षतादि से अष्टदल पर गणेश स्थापना के बाद व्रत संकल्प लेकर गणेश जी, यम, यमदूतों व यमुना जी का पूजन किया जाता है।

यमराज के नाम दीपदान

अकाल मृत्यु व भय बाधाओं से रक्षा के लिए दीप ज्योति पर्व पर दो दिन यमराज का स्मरण किया जाता है। इसके तहत ही धनतेरस व यम द्वितीया पर चार बत्तियों वाला दीप जलाने का विधान है।

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