पूर्व सीएम अजीत जोगी को होश में लाने के लिए ली जा रही म्यूजिक थेरेपी की मदद, सुनाए जा रहे उनके पसंदीदा गाने

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चैतन्य भारत न्यूज

रायपुर. छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी की हालत अब भी नाजुक बनी हुई है। शनिवार को तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वे कोमा में हैं और उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया है। अब डॉक्टर्स उन्हें होश में लाने के लिए दवाओं के साथ म्यूजिक थेरेपी भी दे रहे हैं।

पसंदीदा गाने सुनाए जा रहे

जानकारी के मुताबिक, जोगी को उनके पसंदीदा गाने सुनाए जा रहे हैं। उन्हें फिल्मी गीत ‘पर्वतों से आज मैं टकरा गया, तूने दी आवाज लो मैं आ गया’ और राज्य गीत ‘अरपा पैरी के धार’ सुनाया जा रहा है। श्रीनारायण अस्पताल के डॉक्टर्स टीम के लीडर डॉ. पंकज उमर ने बताया कि, ‘म्यूजिक थेरेपी मस्तिष्क की सोई हुई सेल को जगाने के लिए अपनाई जाती है। थेरेपी मस्तिष्क के सेल को संदेश भेजती है, ताकि मस्तिष्क में गतिविधियां बढ़ सकें और मरीज होश में आ जाए।’

14 दिनों में सामने आता म्यूजिक थेरेपी का परिणाम

डॉ. उमर ने आगे कहा कि, ‘पूर्व सीएम जोगी कोमा में तो हैं, लेकिन जांच में पाया गया कि उनके मस्तिष्क में अधिक नुकसान नहीं हुआ है। ऐसे में म्यूजिक थेरेपी देने पर विचार किया गया।’ बता दें देश-दुनिया में हुए कई शोध में यह सामने आया है कि यदि मरीज के पसंद के गीत, मंत्र या भजन सुनाए जाते हैं तो उसे होश आने की उम्मीद रहती है। इस थेरेपी का परिणाम 14 दिनों में सामने आता है।

दिमाग में थोड़ी हलचल देखी गई

अस्पताल द्वारा मंगलवार को जारी जोगी के मेडिकल बुलेटिन में बताया गया है कि, उनकी जांच में दिमाग में थोड़ी सी हलचल देखी गई है। आंखों की पुतलियों के फैलाव में भी कुछ कमी आई है। बाकी सारी स्थितियां पहले जैसी ही हैं, लेकिन अब भी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

गले में फंसा इमली का बीज

गौरतलब है कि जोगी शनिवार सुबह अपने बंगले के बगीचे में टहल रहे थे। इस दौरान उन्होंने गंगा इमली खाई, उसका एक बीज उनके गले में जाकर फंस गया था। इसके कुछ देर बाद ही उन्हें दिल का दौरा पड़ गया और फिर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहां डॉक्टरों ने उनकी सांस नली से बीज निकाल दिया, लेकिन फिर भी वे आईसीयू में हैं।

क्या होती है म्यूजिक थेरेपी?

म्यूजिक थेरेपी एक ऐसी थेरेपी होती है जिसमें मानसिक और शारीरिक रोगों को म्यूजिक यानी संगीत के ऊंचे, मध्यम और धीमे स्वर के जरिए ठीक करने की कोशिश की जाती है। इस थेरेपी का प्रयोग आमतौर पर मरीज की बीमारी से जुड़ी दवाईयों के साथ जल्दी आराम देने के लिए किया जाता है। संगीत से इलाज या म्यूजिक थेरेपी की अवधारणा अभी भारतीयों में बहुत ज्यादा प्रचलित नहीं है। म्यूजिक थेरेपी तनाव और घबराहट को कम करता है, डिप्रेशन के असर को कम करता है साथ ही मानसिक और शारीरिक तालमेल को भी बेहतर करता है।

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