काशी विश्‍वनाथ मंदिर में दर्शन के लिए अब ड्रेस कोड, जींस-टॉप पहनकर नहीं कर सकेंगे बाबा को स्पर्श

kashi vishwanath mandir, kashi vishwanath mandir ke darshan

चैतन्य भारत न्यूज

वाराणसी. भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक उत्तरप्रदेश के वाराणसी स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर में जल्द ही भक्तों के लिए ड्रेस कोड लागू हो जाएगा। निर्धारित ड्रेस कोड के मुताबिक मंदिर में काशी विश्वनाथ के स्पर्श दर्शन के लिए अब पुरुषों को धोती-कुर्ता और महिलाओं को साड़ी पहनना अनिवार्य होगा। इन्हीं पारंपरिक वस्त्रों के धारण करने के बाद ही काशी विश्वनाथ को स्पर्श किया जा सकेगा।



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रविवार को कमिश्नरी सभागार में मंदिर प्रशासन और काशी विद्वत परिषद की बैठक में यह निर्णय लिया गया। बैठक की अध्यक्षता धर्मार्थ कार्य मंत्री डॉक्टर नीलकंठ तिवारी ने की। उन्होंने काशी विद्वत परिषद के सदस्यों के सामने स्पर्श दर्शन की व्यवस्था को बेहतर बनाने का प्रस्ताव रखा।

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खबरों की मानें तो ड्रेस कोड लागू होने के साथ-साथ स्‍पर्श दर्शन की अवधि भी बढ़ाई जा रही है। यह नई व्यवस्था मकर संक्रांति के बाद लागू होगी और मंगला आरती से लेकर दोपहर की आरती तक प्रतिदिन या व्यवस्था लागू रहेगी।

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बता दें काशी विश्वनाथ मंदिर 12 ज्योतिर्लिंगों में एक है। काशी खण्ड पुस्तक में स्पष्ट वर्णित है कि जीवनपर्यन्त समस्त शिवलिंगों की आराधना से जो पुण्य मिलना कठिन है, वह पुण्य श्रद्धापूर्वक केवल एक ही बार विश्वेश्वर के पूजन से शीघ्र मिल जाता है। इसके स्पर्श मात्र से राजसूय यज्ञ का फल प्राप्त होता है। इसके दर्शन मात्र से तत्वज्ञान का प्रकाश होता है।

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काशी विश्वनाथ के वर्तमान मंदिर का निर्माण महारानी अहिल्या बाई होल्कर ने 1780 में करवाया गया था। इसके बाद महाराजा रणजीत सिंह ने 1853 में 1000 किलोग्राम शुद्ध सोने से इसके शिखर का निर्माण करवाया था। काशी को भगवान शिव की राजधानी कहा जाता है। कहते हैं इसे खुद शिव ने चुना और वो यहां साक्षात मां पार्वती के साथ निवास करते हैं।

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इस शिव मंदिर में साल में सिर्फ एक बार होती है पूजा, दर्शन के लिए एक ही नदी को 16 बार लांघना पड़ता है

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