आर्थिक सर्वे 2019 : आगामी वर्षों में पांच ट्रिलियन डॉलर की बन सकती है भारतीय अर्थव्यवस्था, यहां देखें आर्थिक सर्वे की खास बातें

economic survey

चैतन्य भारत न्यूज

नई दिल्ली. नरेंद्र मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का पहला बजट शुक्रवार यानी 5 जुलाई को पेश होना है। इससे पहले गुरुवार को देश की अर्थव्यवस्था की सेहत और चुनौतियों के साथ आर्थिक सर्वे पेश किया गया। आर्थिक सर्वे में बताया गया है कि साल 2019-20 के लिए देश की जीडीपी ग्रोथ 7 फीसदी रह सकती है। इस आर्थिक सर्वे को मुख्य आर्थिक सलाहकार कृष्णमूर्ति सुब्रमणियम ने तैयार किया है। आर्थिक सर्वे 2019 में दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने के रास्ते में देश के समक्ष चुनौतियों को भी बताया गया है।

तेल की कीमतों में कमी का अनुमान

आर्थिक सर्वे के मुताबिक, जनवरी से लेकर मार्च के बीच अर्थव्यवस्था में सुस्ती की वजह से तेल की कीमत में अस्थिरता रही है। ऐसे में सुब्रमण्यन ने उम्मीद जताई है कि वित्त वर्ष 2020 में तेल की कीमतों में कमी आएगी।

पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार

आर्थिक सर्वे के मुताबिक, भारत में पर्याप्त रूप से विदेशी मुद्रा भंडार है। केंद्रीय सरकार का मानना है कि आने वाले समय में भी विदेश मुद्रा भंडार में कमी नहीं आएगी। 14 जून तक के आंकड़ों के मुताबिक, देश में कुल 42220 करोड़ डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार है।

किसानों की आय में बढ़ोत्तरी

आर्थिक सर्वेक्षण में बताया गया है कि, सरकार वित्त वर्ष 2019 में आर्थिक समेकन के रास्ते पर खड़ी है। सुब्रमणियम ने कहा कि, एनपीए में गिरावट कैपेक्स चक्र को मदद करेगी। सुब्रमण्यन ने यह भी बताया कि मॉनीटरी पॉलिसी कमेटी को ब्याज दर में कटौती करने को लेकर मदद करनी चाहिए।

आर्थिक सर्वे की खास बातें

  • आर्थिक सर्वे में साल 2019-20 के लिए वास्तविक आर्थिक वृद्धि दर 7 फीसदी रहने की उम्मीद जताई है। बता दें पिछले वित्त वर्ष में जीडीपी की वृद्धि दर 6.8 फीसदी थी।
  • भारत का वित्तीय घाटा 5.8 फीसदी तक जा सकता है। बता दें पिछले साल ये आंकड़ा 6.4 फीसदी पर था।
  • अगर भारत को 2025 तक पांच ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था बनाना है तो इसके लिए देश को लगातार आठ फीसदी की रफ्तार बरकरार रखनी होगी।
  • वित्त वर्ष 2019-20 में तेल के दाम में कटौती होने का अनुमान है।
  • 2018-19 में राजकोषीय घाटा बढ़कर 3.4 फीसदी तक पहुंच जाने का अनुमान लगाया है। इसके अलावा अंतरिम बजट में भी राजकोषीय घाटा 3.4 फीसदी रहने की उम्मीद है।
  • आर्थिक सर्वे में यह भी कहा गया है कि सरकार की नीतियों से एफडीआई पर प्रतिबंध बदलने की उम्मीद है।
  • इसके अलावा सर्वे में कहा गया है कि ग्रामीण वेतन वृद्धि, जो कम हो गई थी, वो साल 2018 के मध्य से बढ़ने लगी है।
  • आर्थिक सर्वे के मुताबिक, वैश्विक ग्रोथ रेट कम होने और व्यापार पर बढ़ती अनिश्चितता का असर निर्यात पर देखने को मिल सकता है।

Related posts