MP नगरीय निकाय चुनाव: आयोग 25 दिसंबर के बाद कर सकता है तारीखों का ऐलान, पहली बार पार्षद प्रत्याशी को देना होगी चुनाव खर्च की डिटेल

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चैतन्य भारत न्यूज

मध्य प्रदेश में होने वाले नगरीय निकाय चुनाव की तैयारी पूरी कर ली है। इस बार प्रदेश के 344 निकायों में वोटिंग 2 फेज में होगी। 25 दिसंबर के बाद चुनाव आयोग चुनाव की तारीखों का ऐलान कर सकता है। हालांकि, विधानसभा के शीतकालीन सत्र को ध्यान में रखते हुए जनवरी के पहले सप्ताह तक इसे टाला जा सकता है। इन चुनावों के अंतर्गत, लगभग डेढ़ करोड़ मतदाता अपने मत का प्रयोग करेंगे।

कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए सरकार कुछ खास इंतजाम सरकार करने जा रही है। मतदान केन्द्रों में हर वोटर को ग्लव्स उपलब्ध कराएं जाएंगे, जिसे ईवीएम का बटन दबाने से पहले एक हाथ में पहनना होगा। इन सारे उपायों के मद्देनज़र, राज्य निर्वाचन आयोग ने प्रदेश सरकार से 20 करोड़ रुपए के अतिरिक्त बजट की मांग भी की हैं। पहली बार पार्षद प्रत्याशियों के लिए चुनाव खर्च की सीमा तय कर दी गई है। उन्हें पहली बार अपने चुनाव खर्च की डिटेल भी बतानी होगी।

बता दें निर्वाचन आयोग के पास चुनाव की तैयारियों को पूरा करने हेतु लगभग 140 करोड़ रुपए का बजट पहले से है। सूत्रों के मुताबिक, इस राशि को वोटरों के साथ-साथ मतदानकर्मियों की स्वास्थ्य सुरक्षा में भी खर्च किया जाएगा। इसमें मास्क, ग्लव्स, सैनिटाइजर जैसी चीजों की व्यवस्था की जाएगी।

महानगर में 8.75 लाख, नगर पंचायत में 75 हजार रुपए ही खर्च कर पाएंगे

नगरीय निकाय के चुनावों में आबादी के हिसाब से खर्च की अलग-अलग सीमा तय की गई है। महानगर में पार्षद कैंडिडेट 8 लाख 75 हजार रुपए खर्च सकेंगे। जबकि नगर पंचायत चुनाव में खर्च की लिमिट 75 हजार रुपए तक की गई है। आयोग के एक अधिकारी का कहना है कि कोरोना संक्रमण के चलते पोलिंग बूथ पर वोटर की मैक्सिमम लिमिट एक हजार तय कर दी गई है। इस वजह से प्रदेश में 2,387 पोलिंग बूथ बढ़ गए हैं।

इस बार ऑनलाइन नॉमिनेशन की सुविधा

आयोग के मुताबिक निकाय चुनाव में पहली बार ऑफलाइन के अलावा ऑनलाइन नॉमिनेशन फॉर्म जमा करने की सुविधा दी जाएगी। MP ऑनलाइन पर नॉमिनेशन किया जा सकेगा। फॉर्म जमा करने की फीस 40 रुपए तय की गई है।

ये जानकारियां देनी होंगी

पार्षद प्रत्याशी को खर्च की गई राशि का सोर्स, सार्वजनिक सभा, रैली, जुलूस, प्रचार सामग्री, केबल नेटवर्क, थोक SMS या इंटरनेट, सोशल मीडिया के जरिए प्रचार, वाहन, कार्यकर्ता और एजेंट पर खर्च, चुनाव अभियान में लगाई खुद की रकम, पार्टियों से मिला कैश- चेक, कर्ज, गिफ्ट और दान की रकम की डिटेल बतानी होगी।

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