सब कुछ पाना है अब आसान…

टीम चैतन्य भारत।

विश्व के समस्त परिवर्तनों के मूल कारण विचार ही हैं। प्रत्येक विचार उस नन्हें बीज के समान है, जिसमें एक महान् वृक्ष उत्पन्न करने की शक्ति छिपी है। यदि उस बीज को उचित वातावरण मिले तो निश्चय ही वह हमें सामर्थ्यशाली बना सकता हैः स्वामी विवेकानंद

सच कहा है किसी ने जैसा सोचोगे वैसा बनोगे, मनुष्य जीवन में विचार शक्ति का बहुत बड़ा हाथ रहा है, इसके बिना वह एक पग भी नहीं चल सकता| अच्छे और बुरे विचार कर्म को प्रेरित करते हैं, एवं कर्म ही जीवन का मूल है अतेव विचारों की श्रेष्ठता शुभ कर्मों का आधार है,
परन्तु इच्छा के बिना कर्म की उत्पत्ति नहीं हो सकती। मनुष्य का मन चाहे तभी उसमें कार्य की प्रवृत्ति होती है, इसलिए मनीषियों ने इच्छा एवं मन को कर्म की शक्ति माना है।

इच्छा शक्ति की प्रबलता व्यक्ति को कर्मठ बनती है। क्योंकि इच्छा द्वारा ही सब इन्द्रियां अपने कार्यों में लगती हैं। अत्यन्त निर्बल मनुष्य भी इसके बल से बलवान बन जाता हैं।

क्या करें

सबसे पहले तो अपने मन में अच्छे विचारों का निर्माण करें एवं तदन्तर उन इच्छाओं का सृजन करें| ध्यान रखें, सभी अच्छे और बुरे कार्यों का बीज “विचार” ही हैं जो इच्छा रूपी इधन पाते ही पल्लवित होने लगता है| इसके बल पर श्रेष्ठ कार्य जिनमें चरित्र निर्माण, परोपकार, भगवत्प्राप्ति भी हैं, और इसके विपरीत हत्या, अपहरण, चोरी, डकेती, आदि सभी कर्म इसके गलत प्रयोग का ही परिणाम है।

जो आपको जीवन में चाहिये ऐसे शुभ विचारों पर ध्यान केन्द्रित करें  तभी वह वास्तविक जीवन में प्रकट हो सकती है। विचारों का यह नियम कभी असफल नहीं होता।

विचारों के इस नियम के साथ यदि अवचेतन मन की शक्ति को जोड़ दिया जाए तो यह नियम आपके जीवन में चमत्कार कर सकता है। आपका अवचेतन मन आपकी सफलता में हिस्सेदार है। आप इसे जिस कार्य में लगाएंगे, वह उसी में लग जाएगी। उसी को पूर्ण करने का प्रयत्न करेगी।

कैसे करें

  • शुभ विचारों के संकल्पों को मन में दोहराते जाएं और एक सजीव चित्र अपने मन में बना लें|
  • अपनी सारी ऊर्जा एवं प्रयास उस चित्र के वांछित परिणामों पर लगा दें|
  • इस अभ्यास में निरंतरता बनाए रखें, आपकी प्रतिबद्धता निश्चित सफलता देगी |

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