इंदौर: घातक रसायन से नकली दवा बनाने वाले गिरोह का भंडाफोड़, सरकारी अस्पतालों में भी होती थी सप्लाय

चैतन्य भारत न्यूज

इंदौर. दूध, मावा, तेल व अन्य खाद्य पदार्थ के नकली होने के बारे में तो आपने सुना होगा लेकिन इंदौर में नकली दवा बनाने वाली फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया गया है। यहां एसिडिटी और गैस की समस्या दूर करने वाली दवाइयां सोनामिंट और सोडामिंट सोडियम बाय कार्बोनेट (खाने का सोडा) से टैबलेट बनाई जा रही थी। बता दें नॉन मेडिसनल सोडियम बाय कार्बोनेट शरीर के लिए नुकासनदेह है।


इंदौर क्राइम ब्रांच पुलिस ने शहर में मिलावटी दवाई बनाने वाली फैक्ट्री पर छापा मारा। कार्रवाई के दौरान फैक्ट्री संचालक नरेंद्र (54) पिता एसएल जैन निवासी कालानी नगर और कर्मचारी संतोष (38) पिता साहिबराव पाटिल निवासी धर्मराज नगर को गिरफ्तार किया। आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज किया। यह कार्रवाई क्राइम ब्रांच, आयुष विभाग और ड्रग्स डिपार्टमेंट ने संयुक्त रूप से की है। यहां से पुलिस ने हजारों टैबलेट्स बरामद कीं। ये घातक दवाइयां प्रदेश के सरकारी अस्पतालों और इंदौर के दवा बाजार में भी भेजी जा रही थीं। यह गोरखधंधा पिछले 20 सालों से चल रहा था। पुलिस ने दोनों कारखाने सील कर दिए हैं।

फार्मा कंपनियों और एजेंसियों को करता था सप्लाय

फैक्ट्री संचालक जैन ने कबूल किया है कि यह सोनामिंट टैबलेट दवा बाजार में सप्लाय की जाती है। शासकीय ठेकेदार और फार्मा एजेंसियां भी ये दवाई खरीदते थे। ऐसी दवाइयों के लगातार सेवन से मरीज को गंभीर परिणाम भुगतने पड़ते हैं। आरोपी ने यह भी बताया कि, ‘सोनामिंट टैबलेट में नॉन मेडिसनल सोडियम बायकार्बोनेट, मेनथॉल, जींजर, पिपरमेंट ऑइल, शक्कर व कलर मिलाकर बनाता है। एक डिब्बे में 1000 टैबलेट होती हैं, जो थोक में 17 रुपए और बाजार में 60 रुपए में बिकता है।’

एक्सपायरी डेट निकली दवाइयों की 30 बोरियां मिली

पुलिस के मुताबिक, कारखाने में कुल 27 बोरियां मिलीं जो हानिकारक सोडियम बायकारबोनेट की थीं। नरेंद्र जैन ने अपने भतीजे राजू बंबोरिया के नाम पर ‘फार्माकेम’ नाम से लायसेंस ले रखा था। यह लाइसेंस आयुर्वेदिक दवाई बनाने का था। कारखाने में साल 2009 के पहले की कई एलोपेथिक दवाइयों की 30 बोरी भी रखी मिलीं, जिनकी एक्सपायरी डेट निकल चुकी थी। आरोपी दवाइयां बनाने के लिए दो मशीनों का उपयोग करते थे।

गंदे स्थान पर बन रही थी दवाइयां

आरोपी नरेंद्र ने खुलासा किया कि, हातोद मे पालिया रोड पर उसके भतीजे राजू बंबोरिया का एक और कारखाना है। वहां पर भी एलोपेथिक दवाइयां बनाई जाती हैं। कारखाने पर भी क्राइम ब्रांच की दूसरी टीम ने ड्रग्स विभाग की टीम के साथ दबिश दी तो वहां पर भी लाइसेंस की शर्तो का उल्लंघन और अनियमितता पाई गई। अधिकारियों ने बताया कि, ‘फैक्ट्री में बेहद गंदे स्थान पर दवाइयां बनाई जा रही थी। इनमें न तो सही अनुपात में मिश्रण का इस्तेमाल किया जा रहा था और न ही लेबोरेटरी में उनका टेस्ट किया जा रहा था।

गिरोह में शामिल अन्य लोगों की तलाश में पुलिस

पुलिस अब इस काम में बड़े और संगठित गिरोह के शामिल होने की आशंका जता रही है। अब पुलिस इस गिरोह में शामिल अन्य लोगों के बारे में बता रही है। पुलिस अब सैंपल्स की बाकी रिपोर्ट आने के बाद आरोपियों के खिलाफ और धाराएं बढ़ाएगी।

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