किसानों के आगे झुकी सरकार, कृषि कानूनों को डेढ़ साल तक रोकने के लिए हुई तैयार, प्रस्ताव पर 22 को जवाब देंगे किसान

चैतन्य भारत न्यूज

किसान संगठन और सरकार के बीच बुधवार को 10वें दौर की बातचीत हुई। इस बातचीत के दौरान सरकार कुछ झुकती हुई नजर आई। केंद्र सरकार ने बुधवार को किसान नेताओं को दो प्रपोजल दिए। सरकार ने कृषि कानूनों को लेकर बड़ा बयान देते हुए उसे डेढ़ साल तक रोकने का प्रस्ताव दे दिया है। वहीं कृषि कानूनों को रद्द कराने की मांग पर अड़े किसान नेताओं ने सरकार के प्रस्ताव पर विचार करने के लिए कल तक का समय मांगा है।

बता दें कि इस मुद्दे पर अगली बैठक 22 जनवरी दोपहर 2 बजे विज्ञान भवन में आयोजित होगी। बुधवार को हुई बैठक के बाद किसान संगठन के एक नेता ने कहा कि दोनों पक्षों की सहमति से एक निश्चित समय के लिए तीनों कृषि कानूनों को निलंबित करने और एक समिति के गठन के लिए उच्चतम न्यायालय में हलफनामा दायर करने का प्रस्ताव दिया है।

बता दें बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने गणतंत्र दिवस पर राजधानी दिल्ली में किसान संगठनों द्वारा निकाले जाने वाली ट्रैक्टर रैली पर रोक लगाने की दिल्ली पुलिस की अर्जी पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया है। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया एस.ए. बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि, अदालत द्वारा मामले में हस्तक्षेप करना ठीक नहीं है, क्योंकि कानून और व्यवस्था के मुद्दे पर निर्णय लेने का पहला अधिकार पुलिस का है। शीर्ष अदालत ने 25 जनवरी को मामले पर सुनवाई के लिए केंद्र सरकार के अनुरोध को भी ठुकरा दिया और आवेदन को लंबित रखा। इसके बाद केंद्र ने अपना आवेदन वापस ले लिया।

केंद्र सरकार ने दिल्ली पुलिस के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दायर किया था जिसमें ट्रैक्टर/ट्रॉली/वाहन मार्च या गणतंत्र दिवस पर राष्ट्रीय राजधानी में किसी भी अन्य तरीके से आयोजित रैली पर रोक लगाने की मांग की थी। सरकार ने कहा कि, सुरक्षा एजेंसियों के संज्ञान में आया है कि विरोध करने वाले व्यक्तियों/संगठनों के समूह ने 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस पर एक ट्रैक्टर/ट्रॉली/वाहन मार्च निकालने की योजना बनाई है। केंद्र ने कहा, गणतंत्र दिवस के काम में कोई भी व्यवधान या बाधा न केवल कानून और व्यवस्था के खिलाफ होगी, बल्कि राष्ट्र के लिए भी बहुत बड़ी शर्मिंदगी होगी।

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