जय किसान समृद्धि योजना लागूः किसानों को गेहूं पर मिलेगी 160 रुपए प्रति क्विंटल प्रोत्साहन राशि 

चैतन्य भारत न्यूज।

भोपाल। मप्र शासन ने किसानों को प्रोत्साहित करने और प्रदेश की प्रमुख फसल गेहूं की प्रति हेक्टेयर उत्पादकता बढ़ाने के लिए जय किसान समृद्धि योजना लागू की है। योजना के जरिए किसानों को गेहूं पर 160 रुपए प्रति क्विंटल प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। प्रमुख सचिव, किसान-कल्याण तथा कृषि विकास डॉ. राजेश राजोरा ने जिला कलेक्टरों को योजना के क्रियान्वयन और पर्यवेक्षण के लिये निर्देश जारी किए हैं। योजना के बेहतर क्रियान्वयन के लिए जिला कलेक्टरों की अध्यक्षता में जिला क्रियान्वयन समितियों का गठन किया गया है।

योजना से संबंधित खास बातें…

  • न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गेहूं उपार्जित कराने वाले किसानों के बैंक खातों में 160 रुपए प्रति क्विंटल प्रोत्साहन राशि जमा कराई जाएगी।
  • पंजीकृत किसान द्वारा बोनी एवं उत्पादकता के आधार पर उत्पादन की पात्रता की सीमा तक उपार्जन अवधि में कृषि उपज मण्डी में विक्रय करने पर भी 160 रुपए प्रति क्विंटल की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।
  • मण्डी बोर्ड द्वारा जिन संस्थाओं को क्रय केन्द्र स्थापित कर कृषकों की उपज सीधे क्रय करने के लिए एकल लायसेंस प्रदान किये गए हैं, उनके केन्द्र पर गेहूं विक्रेता पंजीकृत किसानों को भी पात्रतानुसार योजना का लाभ दिया जाएगा।
  • प्रोत्साहन राशि प्राप्त करने के लिए किसान को ई-उपार्जन पोर्टल पर गेहूं उपार्जन का पंजीयन कराना अनिवार्य होगा।
  • मण्डी में गेहूं न्यूनतम समर्थन मूल्य से नीचे अथवा ऊपर के भाव पर बेचा गया हो, दोनों ही परिस्थिति में योजना पंजीकृत किसान को प्रोत्साहन राशि का लाभ दिया जाएगा।
  • गेहूं की उपार्जन अवधि में बढ़ोत्तरी की दशा में मण्डी में विक्रय अवधि स्वयंमेव मान्य होगी।

क्रियान्वयन

प्रदेश में गेहूं का ई-उपार्जन न्यूनतम समर्थन मूल्य पर प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों, नागरिक आपूर्ति निगम तथा राज्य सहकारी विपणन संघ के जरिए किया जाएगा। पोर्टल पर दर्ज तथा उपार्जित मात्रा योजना की प्रोत्साहन राशि के भुगतान के लिए मान्य होगी।

गेहूं उपार्जन के लिए पंजीकृत किसान नियत उपार्जन अवधि में कृषि उपज मण्डी समिति में बोनी के सत्यापित रकबे तथा उत्पादकता को गुणा करने पर आई मात्रा अनुसार पात्रता की सीमा तक गेहूं विक्रय कर सकेंगे। पात्रता में उपार्जन के बाद शेष बची गेहूं की मात्रा पर मण्डी में न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम अथवा ज्यादा विक्रय दर पर विक्रित गेहूं को भी मण्डी में तैयार पोर्टल पर किसान की आई.डी. के साथ दर्ज किया जाएगा।

पंजीकृत किसानों को मण्डी में विक्रय अवधि में विक्रय के समय ई-उपार्जन पोर्टल पर प्राप्त पंजीयन आई.डी. क्रमांक की पर्ची तथा आधार-कार्ड की प्रतिलिपि, दोनों ही मण्डी समिति को घोष विक्रय करते समय देना आवश्यक होगा।

मण्डी में विक्रय किए गए गेहूं पर लायसेंसी क्रेता द्वारा पंजीकृत विक्रेता किसान को विक्रय किए गए गेहूं के कुल मूल्य का 50 प्रतिशत अथवा 10 हजार रुपए, दोनों में से जो भी कम हो, का भुगतान किसान के बैंक खाते में अनिवार्य रूप से आरटीजीएस/नेफ्ट द्वारा करना होगा।

मण्डी में पारदर्शी रूप से पंजीकृत किसानों द्वारा विक्रय करने तथा योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए प्राथमिकता से कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी।

कृषि उपज मण्डी में उपार्जन अवधि समाप्त होने पर पंजीकृत किसान द्वारा गेहूं विक्रय किए जाने पर प्रोत्साहन राशि देय नहीं होगी। ई-उपार्जन पोर्टल पर गेहूं की उपार्जित मात्रा तथा मण्डी में विक्रय की मात्रा को पात्रता की सीमा तक गणना कर किसानवार प्रोत्साहन राशि का अलग से डाटाबेस तैयार किया जाएगा। कलेक्टर द्वारा संचालक, किसान-कल्याण तथा कृषि विकास को मांग-पत्र प्रस्तुत किया जाएगा।

जिला क्रियान्वयन समितियां गठित

योजना के बेहतर क्रियान्वयन के लिए जिला कलेक्टरों की अध्यक्षता में जिला क्रियान्वयन समितियों का गठन किया गया है। उप संचालक, किसान-कल्याण तथा कृषि विकास को समिति के सदस्य सचिव है। जिला पंचायत सदस्य/मुख्य कार्यपालन अधिकारी, अतिरिक्त कलेक्टर, राजस्व, उप पंजीयक, सहकारी संस्थाएं, जिला खाद्य अधिकारी, जिला केन्द्रीय सहकारी बैंक के मुख्य कार्यपालन अधिकारी, नागरिक आपूर्ति निगम के जिला प्रबंधक, राज्य सहकारी विपणन संघ के जिला प्रबंधक, जिला लीड बैंक अधिकारी और जिला मुख्यालय की कृषि उपज मण्डी समिति के सचिव को समिति का सदस्य बनाया गया है।

कृषि केबिनेट करेगी योजना का पर्यवेक्षण

राज्य स्तर पर क्रियान्वयन का पर्यवेक्षण कृषि केबिनेट करेगी। जिला स्तर पर पर्यवेक्षण जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में गठित अंकि द्वारा किया जाएगा।

 

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