बाला रिव्यू : कम बालों या गंजे लोगों का दर्द बयां करती आयुष्मान की ‘बाला’, कॉमेडी-मनोरंजन का बड़ा डोज

bala review

चैतन्य भारत न्यूज

फिल्म : बाला
स्टारकास्ट : आयुष्मान खुराना, यामी गौतम, भूमि पेडनेकर, जावेद जाफरी, सौरभ शुक्ला
निर्देशक : अमर कौशिक
निर्माता : दिनेश विजन
मूवी टाइप : ड्रामा, कॉमिडी
अवधि : 2 घंटा 9 मिनट
सर्टिफिकेट : UA

कहानी

ये कहानी है बालमुकुंद शुक्ला यानी बाला (आयुष्मान खुराना) की, जो अपने सिल्की और शाइनी बालों से बेहद प्यार करता है। बचपन में बाला अपने लंबे बालों और जबरदस्त एटीट्यूड के लिए पहचाना जाता था। स्कूल टाइम से ही बाला कानपुर का शाहरुख खान है, जिसपर स्कूल की कई लड़कियां मरती हैं। लेकिन वक्त का पहिया ऐसा घूमा कि जवानी का दौर आते-आते बाला के ‘बाल’ उससे अलविदा कहना शुरू करते हैं। 25 साल की उम्र तक आते-आते बाल का घना और खिला चमन ऐसा उजड़ा कि सर के बाल तेजी से जाने लगे। बढ़ते गंजेपन के कारण बाला की बचपन की गर्लफ्रेंड उसे छोड़ कर चली जाती है। फिर बाला को नकली बालों का सहारा लेना पड़ा। काले रंग की वजह से बचपन से लोगों का ताना सुनती आईं लतिका त्रिवेदी (Bhumi Pednekar) अपने क्लासमेट बाला को बीच-बीच में छेड़ती रहती। बाला की शादी भी नहीं हो पाती। फिर बाला अपने बालों को वापस लाने के लिए दुनियाभर के नुस्खे अपनाता है और इसी बीच बाला परी मिश्रा (Yami Gautam) से प्यार कर बैठता है। परी बाला की जिंदगी के लिए सच में परी बनकर आती है। परी बाला के गंजेपन से अनजान है। क्या होगा जब उसे बाला के गंजेपन की सचाई का पता चलेगा? क्या बाला खुद अपने गंजेपन को स्वीकार कर पाएगा? यह जानने के लिए आपको फिल्म देखनी होगी।

कैसी है फिल्म

फिल्म की शुरुआत में ही आप बैक-टू-बैक कानपुरिया चटकारे और लफ्फेबाजी में उलझना शुरू हो जाएंगे। फिल्म के पहले सीन से लेकर आखिरी सीन तक आपको सीट छोड़ने का मन नहीं करेगा। फिल्म की कहानी, डायलॉग, स्क्रीनप्ले, म्यूजिक और एक्टिंग जबरदस्त है। फिल्म का फर्स्ट हाफ बहुत मजेदार है, लेकिन सेकंड हाफ में कहानी में भाषणबाजी झलकने लगती है। हालांकि, क्लाइमैक्स एक खूबसूरत संदेश दे जाती है। यह फिल्म कॉमेडी के साथ-साथ मनोरंजन का बड़ा डोज है इसलिए एक बार तो फिल्म देखना जरूर बनता है।

कलाकारों की एक्टिंग

आयुष्मांन ने इस बार भी अपनी शानदार एक्टिंग से सभी का दिल जीत लिया है। उन्होंने यह साबित कर दिखाया है वो हर किरदार में बखूबी फिट हो सकते हैं। आयुष्मान की एक्टिंग में आप उनके किरदार की तकलीफ, उनके दर्द से खुद को जुड़ा महसूस करते हैं। भूमि भी अपने किरदार में शानदार हैं। यामी गौतम की बात करे तो उनका किरदार काफी मजेदार है और उन्होंने अपने करैक्टर को आखिर तक पकड़ा हुआ है।

 

 

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