नोबलमैन मूवी रिव्यू : ड्रामा और किसी मुद्दे पर आधारित कहानी देखने के शौकीन एक बार जरूर देखें यह फिल्म

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चैतन्य भारत न्यूज

फिल्म- नोबलमैन
स्टारकास्ट- कुणाल कपूर, अली हाजी, मोहम्मद अली मीर, शान ग्रोवर, हार्दिक ठक्कर, मुस्कान जाफरी, सोनी राजदान
निर्देशक- वंदना कटारिया
मूवी टाइप- ड्रामा
अवधि- 1 घंटा 51 मिनट
सर्टिफिकेट- A

कहानी-

कहानी शुरू होती है माउंट नोबल हाई बोर्डिंग स्कूल से यहां दसवीं कक्षा में पढ़नेवाला शे (अली हाजी) अपने दोस्त गणेश (हार्दिक ठक्कर) और सहेली पिया (मुस्कान जाफरी) के साथ खुश है। एक दिन बोर्डिंग स्कूल के सबसे पावरफुल गैंग का मुखिया और शे के सीनियर्स अर्जुन (मोहम्मद अली मीर) और उसका दोस्त बादल (शान ग्रोवर) शे को स्विमिंग पूल में मारने की कोशिश करते हैं। लेकिन गणेश की वजह से ड्रामा टीचर मुरली सर (कुणाल कपूर) वहां समय पर पहुंचकर शे को बचा लेते हैं। फिर मुरली सर शे को शेक्सपियर के एक नाटक ‘द मर्चेंट ऑफ वेनिस’ के मुख्य पात्र के लिए चुनते हैं। इसके बाद से ही शे की जिंदगी में हादसों का सिलसिला शुरू हो जाता है। बॉयज स्कूल में पढ़ने वाली पिया उसी स्कूल के टीचर की बेटी है और शे की अच्छी दोस्त भी। नाटक में पिया को पार्शिया का किरदार मिलता है। बादल पिया को पसंद करता है इसलिए वह शे से उसका किरदार छीनकर पिया के साथ नाटक में काम करना चाहता है। किरदार पाने के लिए बादल अपने बिगड़ैल दोस्त अर्जुन की मदद लेता है। बादल और अर्जुन शे से किरदार छीनने के लिए उसे बहुत परेशान करते हैं। अब क्या शे इस नाटक में काम करने से इंकार कर देगा? या फिर वह बादल और अर्जुन से लड़कर जीत हासिल करेगा। यह जानने के लिए आपको फिल्म देखना होगी।

कैसी है फिल्म

फिल्म फर्स्ट हाफ में थोड़ी धीमी है, लेकिन सेकंड हाफ में घटनाक्रम तेजी से आगे बढ़ता है। निर्देशक ने इस फिल्म के जरिए रैगिंग, उसके कारण होने वाली आत्महत्याएं, विद्यार्थियों द्वारा ड्रग्स लेना, शराब पीना आदि यह सब इस फिल्म के माध्यम से दिखाया गया है। यदि आप ड्रामा और मुद्देवाली फिल्में देखने के शौकीन यह फिल्म एक बार जरूर देख सकते हैं।

कलाकारों की एक्टिंग

कुणाल कपूर को छोड़कर फिल्म में कई कलाकार नए हैं, लेकिन फिर भी उन्होंने शानदार अभिनय किया है। शे के किरदार में अली हाजी जम रहे हैं। अली ने फिल्म में अपने किरदार को गहराई से जिया है। शे की मां बनी सोनी राजदान का किरदार थोड़ा कम है लेकिन उन्होंने इसे बखूबी निभाया है। ड्रामा टीचर के रूप में कुणाल कपूर का अभिनय दमदार है। अर्जुन के निगेटिव किरदार में डूबने के लिए मोहम्मद अली मीर ने भी काफी मेहनत की। गणेश के किरदार में हार्दिक ठक्कर और पिया के चरित्र में मुस्कान जाफरी अपने रोल्स में याद रह जाते हैं।

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