वैज्ञानिकों का दावा- चीन नहीं बल्कि फ्रांस में आया था कोरोना वायरस का पहला केस!

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चैतन्य भारत न्यूज

कोरोना वायरस को लेकर फ्रांस के वैज्ञानिकों ने एक बड़ा खुलासा किया है। फ्रांस के वैज्ञानिकों की एक टीम ने दावा किया है कि कोरोना वायरस का पहला मामला चीन के वुहान से पहले यूरोप में 16 नवबंर 2019 को ही आ गया था। लेकिन उस समय डॉक्टर इस बीमारी और उसके लक्षणों को समझ नहीं पाए थे। यदि वैज्ञानिकों का यह दावा सच निकलता है तो हो सकता है कि पूरी दुनिया का ध्यान चीन और वुहान से हटकर फ्रांस की तरफ चला जाए।

उत्तर-पूर्व फ्रांस के एक अस्पताल ने नवंबर से दिसंबर के बीच अस्पतालों में फ्लू की शिकायत लेकर आए 2,500 से ज्यादा लोगों की एक्स-रे रिपोर्ट का अध्ययन किया है। अध्ययन के मुताबिक, यूरोप का पहला केस 16 नवंबर 2019 को फ्रांस के कोलमार शहर में आया था। डॉक्टरों ने इन सभी लोगों की एक्सरे रिपोर्ट की जांच की। इनमें से सिर्फ दो लोगों के एक्सरे में कोरोना वायरस के संक्रमण की पुष्टि हुई है। लेकिन उस समय डॉक्टरों को इस बीमारी और उसके लक्षणों का अंदाजा नहीं था, इसलिए इसका रिकॉर्ड दर्ज नहीं हो पाया।

उत्तर-पूर्व फ्रांस के कॉलमार में स्थित अल्बर्ट श्वित्जर अस्पताल के डॉक्टर माइकल श्मिट और उनकी टीम का यह दावा है कि अब तक यूरोप के जिन देशों में कोरोना के मामले जीरो माने जा रहे थे, वो सारे दावे गलत साबित हो सकते हैं। टीम का दावा है कि चीन में कोरोना का पहला केस ही न आया हो, क्योंकि ये संक्रमण नवंबर तक तो यूरोप में दस्तक दे चुका था। जबकि, फ्रांस ने अपने पहले केस की रिपोर्ट 24 जनवरी 2020 को दी थी।


डॉक्टरों की टीम का यह दावा है कि, ऐसा हो सकता है कि चीन में कोरोना वायरस का पहला मामला कभी आया ही ना हो क्योंकि यह संक्रमण नवबंर तक तो यूरोप में दस्तक दे चुका था। वहीं, दुनिया में कोरोना वायरस फैलाने की वजह चीन के वुहान शहर को माना जाता है। यहां चीन की सरकार ने 31 दिसंबर 2019 को कोरोना संक्रमण की जानकारी पूरी दुनिया को दी थी। लेकिन कोरोना के संक्रमण की खबर 7 जनवरी 2020 को पुख्ता हुई। बता दें फ्रांस में कोरोना के संक्रमित मामले 1,90,000 के करीब हैं और 28,833 लोगों की मौत हो चुकी है। दुनियाभर में कोरोना से संक्रमित देशों में फ्रांस आठवें नंबर पर है।

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