30 साल पुराने मामले में बर्खास्त आईपीएस अधिकारी संजीव भट्ट को उम्रकैद

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चैतन्य भारत न्यूज

जामनगर. 30 साल पहले पुलिस हिरासत में हुई मौत के मामले में पूर्व बर्खास्त आईपीएस अधिकारी संजीव भट्ट और उनके साथी को उम्रकैद की सजा हो गई है। यह फैसला गुजरात के जामनगर कोर्ट ने सुनाया है। दरअसल, 1990 में जामनगर में भारत बंद के दौरान हिंसा हुई थी। उस दौरान एक व्यक्ति की पुलिस की हिरासत में मौत हुई थी। इस मामले में अब संजीव और उनके साथी पुलिस अधिकारी प्रवीण सिंह झाला को सजा हुई है।

यह फैसला जामनगर जिला डिस्ट्रिक और सत्र न्यायाधीश डीएम व्यास ने सुनाया है। बता दें 12 जून को सुप्रीम कोर्ट ने एक निचली अदालत में इस मामले की एक बार सुनवाई शुरू करने की अपील खारिज कर दी थी। दरअसल, भट्ट ने मांग की थी कि 11 अतिरिक्त गवाहों को कोर्ट में दोबारा बुलाया जाए। इससे पहले भट्ट उस समय सुर्खियों में आए थे जब गुजरात सरकार ने उनके पर मुकदमा चलाने की अनुमति नहीं दी थी। उस समय नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे।

क्या है मामला 

साल 1990 में भारत बंद के दौरान जामनगर में हिंसा हुई थी। उस समय भट्ट जामनगर के एसएसपी थे। पुलिस ने 133 लोगों को गिरफ्तार किया था। इन लोगों में एक आरोपी प्रभुदास वैष्णव भी शामिल था। कस्टडी में ही भट्ट समेत और भी सात लोगों ने उसे टॉर्चर किया था। बाद में प्रभुदास की अस्पताल में मौत हो गई थी। उस समय इन सात लोगों के खिलाफ केस दर्ज भी हो गया था, लेकिन केस आगे नहीं बढ़ रहा था। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद यह केस जामनगर डिस्ट्रिक एंड सेशन कोर्ट तक पहुंचा था। इसके बाद गुरुवार को संजीव भट्ट और उनके साथी कॉन्स्टेबल प्रवीण सिंह झाला को उम्र कैद की सजा हुई।

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